Brain of Teen Girls: कोरोना काल हमारे लिए किसी दुःस्वपन्न से कम नहीं है. लॉकडाउन ने जिस तरह से हमें छोटी सी चारदीवारी में कैद कर दिया उससे हमारे मन मस्तिष्क में गहरा घाव हो गया. मानसिक रूप से हम इतने परेशान हो गए कि इसका खामियाजा आज तक हमें भुगतना पड़ रहा है. अब एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि लॉकडाउन की खौफ ने उस समय की टीनएज लड़कियां यानी किशोर उम्र की बच्चियों के दिमाग पर गहरा असर किया है. स्टडी के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान बच्चियों का अपने सहेलियों या अन्य लोगों से मिलना-जुलना कम हो गया इसका सीधा असर उसके ब्रेन पर पड़ा. हालांकि यह असर लड़कों पर भी पड़ा लेकिन लड़कियों की तुलना में कम हुआ.
लड़कों का 1.4 तो लड़कियों का 4.2 साल ज्यादा बूढ़ा हुआ दिमाग
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन और अमेरिकी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन से पहले और लॉकडाउन के बाद जब लोगों के ब्रेन का विश्लेषण किया तो इसमें हैरान करने वाले नतीजे सामने आए. अध्ययन में पाया गया कि टीनएज लड़कियों का दिमाग लड़कों की तुलना में औसतन 4.2 साल ज्यादा बूढ़ा हो गया. हालांकि लड़के के दिमाग पर भी असर हुआ. लड़को का दिमाग उसकी वास्तविक उम्र से औसतन 1.4 साल ज्यादा बूढ़ा हो गया. यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन की प्रोफेसर पेट्रीशिया कुहल ने बताया कि हम इस डाटा को देखकर स्तब्ध हो गए. क्योंकि लड़कों की तुलना में यह फर्क बहुत ज्यादा था. शोधकर्ताओं ने कोरोना काल से पहले 2018 में करीब 160 एमआरआई को खंगाला जिनकी उम्र 9 से 17 साल के बीच थी. अब इन बच्चों के ब्रेन का एमआरआई दोबारा 2021 और 2022 में किया. इसके बाद जब एमआरआई का मिलान किया तो ये परिणाम सामने आए.
इसका असर क्या होगा
दिमाग के बूढ़ा होने का सबसे बड़ा फर्क यह होगा कि बड़े होने पर उनमें सीखने की क्षमता प्रभावित होगी. इसमें पाया गया कि लड़कियों के दिमाग का कॉरटेक्स वाला हिस्सा ज्यादा पतला हो गया जो बढ़ते उम्र का सूचक होता है. लड़कियों के दिमाग के कई हिस्सों में बदलाव भी देखा गया. दिमाग का जिन हिस्सों में बदलाव हुआ है वह सामाजिक ज्ञान का बोध, भावनाओं की प्रक्रिया, हाव-भाव और भाषाओं से जुड़ा हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये चीज संवाद की प्रक्रिया के लिए बेहद जटिल है, इससे किस तरह का शारीरिक बदलाव होता है यह आने वाले वक्त में पता चलेगा. प्रोफेसर पैट्रीशिया ने कहा लड़कियों की तुलना में लड़कियों का टीनएज उम्र में सामाजिक जीवन बहुत महत्वपूर्ण होता है. लड़कियों इस उम्र में अपनी सामाजिक मंडली से गहरी जुड़ी होती है और शारीरिक, भावनात्मक और आवेग वाले मनोदशाओं के लिए यह बहुत जरूरी है.
FIRST PUBLISHED : September 11, 2024, 14:10 IST
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