हमारी दुनिया अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं से भरी हुई है, जिसपर आप विश्वास करते हैं. कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहकर टाल भी देते हैं. बहुत सी मान्याताओं के पीछे की कहानी, कहीं न कहीं विज्ञान से जुड़ी हुई है. इसी तरह से बिल्ली के द्वारा रास्ता काटने को अपशगुन बनाने वाली कहानी भी साइंस से जुड़ी हुई है. आइए जानते हैं कि क्या सचमुच यह अंधविश्वास है या पहले का कोई मामूली ज्ञान, जो अब एक मान्यता के रूप में बन गई है.
पश्चिमी देशों में शीशा तोड़ने की मान्यता है कि इससे सात साल तक दुर्भाग्य बना रहता है. भारत में काली बिल्ली के रास्ता काटने पर हम अपनी गाड़ी रोक लेते हैं. यह प्रथा सदियों पुरानी है और इतनी आम है कि हममें से अधिकांश लोग, अगर खुद इसका पालन नहीं करते हैं, तो निश्चित रूप से किसी ऐसे व्यक्ति को जानते होंगे जो इसका पालन करता होगा. हालांकि, क्या आपने कभी सोचा है कि जब काली बिल्ली सड़क पार करती है तो हमें गाड़ी रोकने की सलाह क्यों दी जाती है? क्या यह दुर्भाग्य लाती है या इसके पीछे कोई इतिहास है? आइए जानें.
हिंदू धर्म के अनुसार, काला रंग शनि का रंग है और बिल्लियों को राहु की सवारी माना जाता है. इसलिए, अगर काली बिल्ली आपके घर के रास्ते में आती है तो इसे शनि और राहु दोनों के क्रोध का संकेत माना जाता है. इसलिए, ऐसा माना जाता है कि बिल्ली के दिखने के बाद कुछ समय तक प्रतीक्षा करने से इन शांत करने वाले देवताओं का क्रोध शांत हो जाता है.
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हालांकि, बहुत दिलचस्प बात यह है कि एक और ऐतिहासिक प्रथा भी है, जो आज भी प्रचलित है. इतिहास देखें तो, पहले के लोग कहीं ट्रैवल के लिए बैलगाड़ी का इस्तेमाल करते थे. बैलगाड़ियां चलाने वाले बैल रास्ते में बिल्लियां देखकर पागल हो जाते थे और अक्सर इधर-उधर उछल-कूद करते थे, जिससे कभी-कभी यात्रियों को चोट लग जाती थी. लोगों को जानवरों को शांत करना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था. बिल्ली को देखने के कुछ समय बाद उस जगह से चले जाने की प्रथा बन गई. धीरे-धीरे, यह वर्षों से अंधविश्वास में बदल गया और आज तक लोग इस प्रथा का पालन करते आ रहे हैं कि जब भी उन्हें रास्ते में कोई काली बिल्ली दिखती है, तो वे रूक जाते हैं.
FIRST PUBLISHED : September 13, 2024, 11:07 IST







