बागपत: महर्षि वाल्मीकि का आश्रम बागपत जिले में स्थित है. यह रामायण काल से जुड़ा हुआ एक पवित्र स्थान है. इस आश्रम का महत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में है. लोग इसे आस्था के बड़े केंद्र के रूप में देखते हैं. इस ऐतिहासिक स्थल पर लोग रामायण से जुड़े प्रसंगों को जानने और भगवान राम के जीवन से जुड़ी घटनाओं का अनुभव करने के लिए आते हैं.
लव-कुश का जन्म स्थान
महंत श्री आनंदेश्वर गिरी जी महाराज के अनुसार, लव-कुश का जन्म इसी आश्रम में हुआ था. जब भगवान राम ने माता सीता का परित्याग किया, तो लक्ष्मण उन्हें इसी स्थान पर छोड़कर गए थे. लव-कुश की शिक्षा भी यहीं पर हुई थी और यह स्थान उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना.
आश्रम का पवित्र महत्व
बालैनी गांव में स्थित इस आश्रम का संबंध महर्षि वाल्मीकि से है, जिन्होंने पंचमुखी महादेव को यहां स्थापित किया था. यहीं पर माता सीता सती हुई थीं, जिससे इस स्थान की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है.
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श्रद्धालुओं का उमड़ता जनसैलाब
नवरात्रि और अन्य पर्वों के समय इस पवित्र स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. विशेष रूप से आखा तीज पर यहां एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है, क्योंकि इसी दिन लव-कुश का जन्म हुआ था. श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. नौ दिन तक अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं. लोग मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को जानने के लिए यहां आते हैं.
बता दें कि सिर्फ यही आश्रम ही नहीं. पूरे यूपी में ऐसे कई सारे खास मंदिर और जगहें हैं, जिनकी पीछे की कहानी रहस्यमयी है. लोग इन जगहों पर पूजा-पाठ करने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं.
FIRST PUBLISHED : September 24, 2024, 16:20 IST
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