कानपुर: देशभर में दशहरा का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. हर जगह रावण के अहंकारी रूप का प्रतीकात्मक दहन किया जाता है. लेकिन, कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी है, जिसे “दशानन मंदिर” के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन ही खुलता है, और उस दिन यहां रावण की पूजा की जाती है. लोग रावण के ज्ञान, बल, और बुद्धि के लिए उसकी अराधना करते हैं.
155 साल पुराना है दशानन मंदिर
कानपुर के शिवाला में स्थित दशानन मंदिर करीब 155 साल पुराना है. यह मंदिर सिर्फ दशहरे के दिन ही खुलता है. बाकी दिनों बंद रहता है. दशहरे के दिन सुबह मंदिर की साफ-सफाई के बाद विशेष आरती का आयोजन होता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं. इस मंदिर की अनोखी परंपरा और साल में केवल एक दिन पूजा का आयोजन इसे बेहद खास बनाता है.
रावण के ज्ञान और बल की पूजा
मंदिर के पुजारी पंडित राम बाजपेई के अनुसार, जब पूरे देश में विजयादशमी के दिन रावण के अहंकारी रूप का दहन किया जाता है, तब कानपुर के इस मंदिर में रावण के बल और बुद्धि के प्रतीक रूप की पूजा होती है. पंडित बाजपेई बताते हैं कि रावण जैसा विद्वान, प्रज्ञानी और शिव भक्त दुनिया में शायद ही कोई हुआ हो. रावण के पास अनोखी शक्तियां थीं और उसी ज्ञान रूपी रावण की पूजा इस मंदिर में दशहरे के दिन की जाती है.
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दशानन मंदिर का इतिहास
दशानन मंदिर का निर्माण 1868 में महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल द्वारा कराया गया था. वह भगवान शिव के परम भक्त थे और रावण को विद्या और शक्ति का प्रतीक मानते थे. इसी कारण उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया, जहां हर साल दशहरे के दिन विशेष रूप से पूजा की जाती है. यहां लोग तेल वाले दीपक चढ़ाते हैं और रावण के ज्ञान और बल की प्रार्थना करते हैं.
यह मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा और रावण की पूजा के लिए जाना जाता है, जो दशहरे के दिन इसे और भी विशेष बना देता है.
FIRST PUBLISHED : October 12, 2024, 15:05 IST
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