रायपुर:- राजधानी रायपुर में बड़े ही धूम धाम के साथ नवरात्र पर्व मनाया जा रहा है. नवरात्र पर्व में आदिशक्ति मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना होती है. नवरात्रि में छत्तीसगढ़ स्थित देवी मंदिरों में उत्साह चरम पर रहता है. आज हम आपको राजधानी रायपुर स्थित ऐतिहासिक और बहुत प्राचीन मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जिसका इतिहास बेहद रोचक है. इसके अलावा यहां स्थापित देवी माता की मूर्ति स्वयंभू है. हम कंकाली माता के बारे में बात कर रहे हैं.
700 साल पुराने मंदिर की कहानी
रायपुर स्थित कंकाली माता मंदिर वैसे तो घनी आबादी के बीचों-बीच बसा है. लेकिन इसकी ख्याति तांत्रिक पीठ के रूप में है. पुजारी आशीष शर्मा ने Bharat.one से बातचीत के दौरान बताया कि मंदिर को लेकर कई किवदंतियां हैं. कंकाली माता का मंदिर लगभग 700 वर्ष पुराना है. कंकाली मठ के पहले महंत कृपालु गिरी को देवी ने सपने में दर्शन देकर कहा था कि मुझे मठ से हटाकर तालाब के किनारे स्थापित करो. देवी की बात मानकर ही महंत ने तालाब के किनारे देवी की अष्टभुजी प्रतिमा को प्रतिष्ठित करवाया. कंकाली माता मंदिर आने वाला हर शख्स देवी से जुड़े चमत्कारों को मानता है. नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. साथ ही विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
नागा साधुओं से जुड़ा है इतिहास
रायपुर के कंकाली माता मंदिर और कंकाली मठ का इतिहास नागा साधुओं की साधना से जुड़ा हुआ है. नागा साधुओं ने ही श्मशान घाट पर देवी के इस मंदिर की स्थापना की थी. 13वीं शताब्दी में दक्षिण भारत से कुछ नागा साधुओं की टोली यहां से गुजरी. तब इस जगह पर श्मशान घाट हुआ करता था. नागा साधुओं ने अपने सिद्धि और तप के लिए यहां मठ की स्थापना की. 17वीं शताब्दी में कृपालु गिरी इस मठ के पहले महंत हुए. कृपालु गिरि के बाद उनके शिष्य भभुता गिरी ने मंदिर की बागडोर संभाली.
पुजारी आशीष शर्मा Bharat.one को आगे बताते हैं कि मंदिर प्रतिष्ठा के बाद महंत कृपाल गिरि को कंकाली देवी ने साक्षात कन्या के रूप में दर्शन दिया था. लेकिन महंत देवी को नहीं पहचान पाए और देवी का उपहास कर बैठे. जब उनको अपनी गलती का एहसास हुआ, तब महंत कृपालु गिरी ने मंदिर के बगल में ही जीवित समाधी ले ली. महंत के समाधि स्थल के पास ही शिवलिंग की स्थापना की गई है.
FIRST PUBLISHED : October 12, 2024, 11:40 IST
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