किसी को वर्कलोड स्ट्रेस है तो कोई अपने रिलेशनशिप को लेकर तनाव में है, किसी पर पढ़ाई में अच्छी परफॉर्मेंस का दबाव है तो कोई जिम्मेदारी के बोझ से टेंशन में है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति किसी ना किसी वजह से परेशान, बैचेन और डरा हुआ रहता है. लेकिन जब यह सब चिंता दिमाग पर हावी होने लगे तो यह एंग्जाइटी का रूप ले लेती है. एंग्जाइटी का अगला पड़ाव डिप्रेशन होता है. एंग्जाइटी एक मेंटल डिसऑर्डर है जिसका समय रहते इलाज ना हो तो यह व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
एंग्जाइटी को पहचानें
कुछ लोग हमेशा किसी सोच में गुम रहते हैं. जो लोग अकेलापन महसूस करते हैं वह हद से ज्यादा सोचते हैं. ऐसा व्यक्ति लोगों से बात करने से बचता है. एंग्जाइटी का शिकार व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता है. वह हर बात को लेकर जल्दी परेशान होता है, तुरंत गुस्सा करता है और चिल्लाने लगता है. ऐसे लोग हमेशा डरे सहमे रहते हैं. उनके अंदर कॉन्फिडेंस नहीं होता.
दुविधा में रहते हैं
जो लोग एंग्जाइटी के शिकार होते हैं, उन्हें ब्रेन फॉगिंग होती हैं. यानी ऐसे व्यक्ति हर बात को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. वह चीजों को रखकर भूलने लगते हैं. कोई भी बात उन्हें याद नहीं रहती. वह कई बार अपनी गलती को मानते भी नहीं हैं. ऐसे लोग किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाते.
पुरुषों के मुकाबले महिलाएं एंग्जाइटी की ज्यादा शिकार होती हैं (Image-Canva)
सोने में होती है परेशानी
एंग्जाइटी में कई लोग इनसोमनिया से ग्रस्त हो जाते हैं. एंग्जाइटी की वजह से उनकी नींद डिस्टर्ब रहने लगती है. वह अचानक डर कर उठ जाते हैं. नींद टूट-टूटकर आती है. सोने के बाद भी थकान दूर नहीं होती है. कई बार पूरी रात सोचने में गुजर जाती है. वहीं कुछ लोग एंग्जाइटी की वजह से पूरा दिन बिस्तर से नहीं उठते.
कुछ समझ नहीं आता
ऐसे मरीजों का दिमाग सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करता है. एंग्जाइटी में लोगों का अपने शरीर पर कंट्रोल नहीं रहता. उनके हाथ-पैर कांपने लगते हैं. खूब पसीना आता है. अगर उन्हें चोट लग जाए या खून निकलने लगे, तो वह समझ नहीं पाते कि उनके साथ क्या हो रहा है.
पैनिक अटैक होने लगते हैं
एंग्जाइटी होने पर व्यक्ति की सांस बढ़ जाती हैं, हार्ट रेट अचानक बढ़ता है जिससे बॉडी रेस्टलेस होने लगती है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. कुछ लोगों का एंग्जाइटी होने से डाइजेशन खराब हो जाता है और कुछ को पैनिक अटैक भी आने लगते हैं. ऐसे में लोग खुद को या दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
कई तरह के एंग्जाइटी डिसऑर्डर
एंग्जाइटी डिसऑर्डर कई तरह के होते हैं. मायो क्लिनिक के अनुसार जिन लोगों को Agoraphobia नाम का एंग्जाइटी डिसऑर्डर होता है, वो किसी एक सिच्युएशन या जगह पर जाने से डरते हैं. कुछ लोगों को किसी बीमारी की दवा खाने से एंग्जाइटी होने लगती है. जो लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं और डिप्रेशन का भी शिकार होते हैं, उन्हें जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर होता है. जिन लोगों को पैनिक अटैक आते हैं, उन्हें पैनिक डिसऑर्डर होता है. जिन बच्चों का पेरेंट्स का बचपन में डिवोर्स हुआ हो या वह बचपन में उनसे बिछड़ गए हो, ऐसे लोग सेपरेशन एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं. कुछ व्यक्तियों को लोगों से मिलने से डर लगता है, ऐसे लोग सोशल फोबिया से ग्रस्त होते हैं.
रूटीन में कुछ बदलाव, अच्छी डाइट और एक्सरसाइज से एंग्जाइटी की समस्या दूर हो सकती है (Image-Canva)
सही समय पर इलाज जरूरी
मनोचिकित्सक मुस्कान सिंह कहती हैं कि जब कोई व्यक्ति हद से चीजों के बारे में सोचने लगता है और इससे उनका काम, उनका रिलेशनशिप और जिंदगी प्रभावित होने लगती है तो यह खतरे की बात है. अगर ऐसा व्यक्ति लोगों से बात करने बचे, अकेलेपन का शिकार हो, अल्कोहल पीना शुरू कर दे, अचानक उसका बर्ताव बदल जाए या मन में खुदकुशी का ख्याल आने लगे तो तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाएं. एंग्जाइटी एक बीमारी है जो दवा और काउंसलिंग से ठीक हो सकती है.
एंग्जाइटी को ना होने दें हावी
डर और तनाव को दूर करने के लिए हर व्यक्ति को स्ट्रेस मैनेजमेंट सीखना चाहिए. मनोचिकित्सक मुस्कान सिंह के अनुसार इसमें कई टेक्नीक शामिल होती हैं. हर रोज मेडिटेशन करें, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें और मॉर्निंग या इवनिंग वॉक करें. डांस या स्विमिंग पसंद है तो वह भी कर सकते हैं. इसे स्ट्रेस दूर होता है. हफ्ते में एक दिन अपनी हॉबी को समय दें. पेंटिंग, सिंगिग, गार्डनिंग या जिस चीज का शौक है, उसे करें. हर हफ्ते अपने दोस्तों से मिले. सोशल होना बहुत जरूरी है. अपने मन की बात किसी ऐसे व्यक्ति से करें जो आपको समझता हो. म्यूजिक सुनें या किताबें पढ़ें, इससे भी तनाव दूर होता है. इसके अलावा चाय या कॉफी का सेवन ना करें.
FIRST PUBLISHED : November 10, 2024, 11:07 IST
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-what-is-anxiety-how-it-can-affect-mental-health-know-symptoms-8824007.html

















