गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जिसका इतिहास जानकर आप हैरान हो जाएंगे. यह मंदिर 1500 साल पुराना माना जाता है. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी इसका बहुत महत्व है. जानें इस मंदिर का इतिहास.
जानिए क्या है इस मंदिर का इतिहास
वहीं, गांव निवासी राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि यह मंदिर लगभग 1500 साल पुराना माना जाता है. यह मंदिर राजा देवी बख्श सिंह के जमाने का है. लोगों का मानना है कि पहले जब महिलाएं शती होती थी, तो इसी स्थान पर होती थीं. इसलिए यहां पर शति चौरा नाम से मंदिर का निर्माण किया गया है.
जानें क्या है मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोगों ने Bharat.one से बातचीत में बताया कि राजा देवी बख्श सिंह के शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण हुआ था. राजा देवी बख्श सिंह गोंडा क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण शासक थे और उनके समय में कई धार्मिक और सांस्कृतिक संरचनाओं का निर्माण किया गया था.
इसका सती प्रथा से है संबंध
कहा जाता है कि पुराने समय में जब महिलाएं सती होती थी. तब यह स्थान उन घटनाओं का केंद्र था. इसी स्थान पर सती होने वाली महिलाओं की स्मृति में यह मंदिर बनाया गया था.
जानें क्यों पड़ा शती चौरा नाम
इस स्थान का नाम सती चौरा इसलिए रखा गया है. क्योंकि यह देवी शक्ति को समर्पित है. यहां पर लोगों की मान्यता है कि यह स्थान महिलाओं की शक्ति और आत्म-बलिदान का प्रतीक है.
जानें वर्तमान में शति चौरा का महत्व
वर्तमान में शती चौरा मंदिर गोंडा के स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. यहां पर विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान भक्तों की काफी संख्या में भीड़ रहती है. क्योंकि देवी शती की पूजा अर्चना करने के लिए यहां लोग आते हैं.
बता दें कि मंदिर के आसपास के क्षेत्र में कई किंवदंतियां और लोक कथाएं भी प्रचलित हैं, जो इस स्थान को और अधिक रहस्यमय बनाती हैं. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी इसका बहुत महत्व है. क्योंकि यह हमें प्राचीन भारतीय समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों की झलक दिखाता है.
FIRST PUBLISHED : November 15, 2024, 13:28 IST

















