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Dev deepawali 2024 devotees gathered in Thawe Maa Singhasinis court lit up with thousands of lamps

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गोपालगंज. बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ थावे धाम में शुक्रवार की शाम देव दीपावली की धूम रही. हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यहां दीपदान कर माता रानी से सुख- समृद्धि की कामना की. यहां सिविल कोर्ट के न्यायाधीश, जिला प्रशासन के अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, शिक्षाविद, प्रबुद्ध नागरिक तथा समाज सेवियों के अलावा आम श्रद्धालु पहुंचे और मां के चरणों में दीपदान किया.

मान्यता है कि मां थावे वाली के दरबार में देव दीपावली के दिन दीपदान करने से दरिद्रता का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि घर में आती है. इसलिए, यहां श्रद्धालुओं की भीड़ देव दीपावली के दिन लगती है. श्रद्धालु खुद से दिया बाती वह तेल लेकर आते हैं और यहां दीपदान करते हैं.

दूर-दूर से पहुंचे थे श्रद्धालु

देव दीपावली पर मां थावे वाली के दरबार में दीपदान करने के लिए गोपालगंज के अलावा आस-पास के दर्जनों जिलों से श्रद्धालु पहुंचे थे. इसके अलावा पड़ोसी राज्य यूपी और पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालु भी आए थे. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन की ओर से पुलिस बल्कि तैनाती भी की गई थी. दीपदान के बाद संध्या आरती हुई जिसके बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया.

दीपों से बनाया गया तरह-तरह की आकृति

मां थावे वाली के दरबार में दीपदान करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने दीपों से कई तरह की आकृति बनाई. श्रद्धालुओं के समूह ने कहीं दीपों से मां लिखा, तो कहीं दीपों से स्वास्तिक का चिन्ह बनाया. कहीं ओम की आकृति सजाई. कई श्रद्धालु सपरिवार दीपदान करने के लिए आए थे. सबने दीपदान के बाद मां थावे वाली से अपनी मनोकामना कही. बता दें कि मां विंध्यवासिनी के साधू डब्लू गुरु की प्रेरणा से तत्कालीन डीएम पंकज कुमार ने इस परंपरा के शुभारंभ कराया था. इसके बाद लोक आस्था का केंद्र बन गया.

देव दीपावली पर दीन दान का है विशेष महत्व

मंदिर के मुख्य पुजारी संजय पांडेय ने Bharat.one को बताया कि देव दीपावली में मां के चरणों में दीपदान कर श्रद्धालु सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और आरोग्य की कामना करते हैं. देव दीपावली पर मां के दरबार में जलने वाले दीप से दरिद्रता का नाश हो जाता है. मां की कृपा से दीपदान करने भक्तों घर में सुख शांति बनी रहती है. उन्नति का द्वार खुलता है. समस्त देवता भी देव दीपावली मनाते हैं. इसलिए, दीपदान करने का महत्व है. पितृदेव भी प्रसन्न होते हैं.

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