खंडवा. जब भी वड़ा पाव का जिक्र होता है, वैसे ही जेहन में मुंबई की तस्वीर सामने आती है. अब वड़ा पाव का चलन धीरे-धीरे लोकल क्षेत्र में भी देखा जा रहा है. यहां लोकल क्षेत्र में भी खाने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. इसको लेकर वड़ा पाव बनाने वाले भी अब इसकी क्वालिटी पर फोकस कर रहे हैं.
खंडवा के लोकल क्षेत्र की बात की जाए तो भुसावल में वड़ापाव काफी फेमस है. अब यह भुसावल से खंडवा शहर में भी अपनी एंट्री कर चुका है. लोकल क्षेत्र में भी लोगों को इसका भरपूर आनंद मिलने लगा है. अब खाने के शौकीनों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि भुसावल का वड़ा पाव अब खंडवा में भी बन रहा. इस वड़ा पाव की खासियत है कि यह खड़े मसालो में बनता है, जिसका टेस्ट भी लाज़वाब होता है.
स्वाद में इतना लजीज की हर कोई मुरीद
इसे खाने के दीवाने इस दुकान पर पहुंच रहे है. वैसे तो इस वड़ा पाव का टेस्ट एक दम तीखा है और चटपटा है. इस बड़ा पाव ने मुंबई के वड़ा पाव को भी फेल कर दिया है. बबलू अग्रवाल का कहना है कि यह मुंबई के वड़ा पाव से भी हटकर है. इसे पूरी तरह से खड़े मसाले तैयार किया जाता है. इसका पाव भी अलग क्वालिटी का है.
कई तरह के वड़ा पाव
यहां कई तरह के वड़ा पाव दिए जाते हैं. एक चटनी वाला और एक सादा. सादे में वड़ा पाव ओर मिर्ची दी जाती है. दूसरा वड़ा पाव चटनी के साथ दिया जाता है. इसमे पुदीने की चटनी, मिर्ची और भी अन्य सामान दिया जाता है.
यह है वड़ा पाव का इतिहास
वैसे वड़ा पाव के इतिहास की बात करें तो वड़ा पाव की शुरुआत 1978 में अशोक वैद्य नामक शख्स ने की थी. दादर स्टेशन के बाहर उनका फूड स्टॉल था. उस समय उन्होंने आलू भाजी और चपाती खाने की बजाय आलू भाजी बनाई और उसे बेसन में डुबोकर उसका वड़ा तैयार किया. चपाती की जगह पाव परोसा गया. उस दौर में समय और धन की कमी के कारण, लोगों को पेट भर खाना नहीं मिल पाता था. इसलिए अशोक वैद्य ने कम पैसे में पेट भरने वाला खाना बनाने का फैसला किया और वड़ापाव बनाया.
Edited By- Anand Pandey
FIRST PUBLISHED : November 20, 2024, 13:56 IST
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