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कब है शनि त्रियोदशी व्रत? इस दिन पूजा पाठ से साढ़ेसाती और ढैय्या का असर होता है ख़त्म, जानें महत्व

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ओम प्रयास /हरिद्वार. हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल 24 त्रियोदशी तिथि का आगमन होता है. त्रयोदशी का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है. वैदिक पंचांग और हिंदू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार को होने से इसका और अधिक महत्व बढ़ जाता है. मार्गशीर्ष मास के बाद पौष मास के  कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार को होने से प्रदोष व्रत करने पर जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष माह की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत विशेष फल प्रदान करने वाला है. जो जातक शनि जनित कष्टों से पीड़ित हैं, उनके लिए त्रियोदशी तिथि को होने वाला व्रत बेहद ही खास और विशेष फल प्रदान करने वाला है. इस दिन भोलेनाथ की पूजा पाठ, दान आदि करने पर विशेष लाभ की प्राप्ति होगी.

पौष माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होने वाले शनि प्रदोष व्रत के बारे में ज्यादा जानकारी Bharat.one को देते हुए हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि पौष माह में मांगलिक कार्य करने वर्जित होते हैं, लेकिन धर्म कर्म, व्रत, पूजा पाठ आदि श्रद्धा भक्ति भाव से करने पर सभी प्रकार के दोषों से छुटकारा मिल जाता है. साल 2024 में 28 दिसंबर को पौष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शनि प्रदोष व्रत करना विशेष फलदाई होगा. जिन जातकों पर शनि देव की साढ़ेसाती और ढैया चल रही है, उनके द्वारा इस दिन त्रयोदशी का व्रत करने और भोलेनाथ के निमित्त दान आदि करने पर विशेष फल प्राप्त होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन प्रदोष व्रत करने पर सभी 12 राशियों के जातकों को शनिदेव जनित कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा.

ऐसे करें व्रत और पूजन विधि

पंडित श्रीधर शास्त्री Bharat.one को बताते हैं कि शनि प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके भगवान भोलेनाथ के निमित्त त्रयोदशी व्रत का संकल्प लें. त्रयोदशी व्रत का संकल्प करने के बाद घर के देवालय में बैठकर एकाग्र मन से भोलेनाथ के बीज मंत्र, वैदिक मंत्र का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद, पुष्प आदि अर्पित करें. साथ ही शनिदेव के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।। का 108 बार जाप करें. पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करते हुए फलाहार लें और 28 दिसंबर के प्रदोष काल में भोलेनाथ के सिद्ध पीठ स्थल या घर के देवालय में ही भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हुए शिव तांडव, रुद्राष्टक, शिव महिम्न, पंचाक्षर आदि स्तोत्र का पाठ करें. शनिवार को प्रदोष का व्रत होने से शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा. जिन राशियों पर शनि देव की कष्टी, साढ़ेसाती या ढैया चल रही हैं उनके द्वारा शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाकर दोनों हाथ जोड़कर शनिदेव का ध्यान करें और इसके बाद शनि देव के निमित्त किसी गरीब, असहाय व्यक्ति को काले तिल, नीले वस्त्र, कला या नीला कंबल आदि दान करने से शनि देव जनित पीड़ा से शांति मिल जाती हैं. शनिदेव के वैदिक मंत्र का जाप करने से शनि देव विशेष फल प्रदान करते हैं.

वैदिक मंत्र: ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। ॐ शंयोरभिश्रवन्तु नः।

Note: 28 दिसंबर 2024 को शनि प्रदोष व्रत की महिमा के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री से उनके फोन नंबर 9557125411 और 9997509443 पर संपर्क कर सकते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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