
दीपक पांडेय/खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन में स्थित देश का इकलौता नवग्रह मंदिर पंचक्रोशी पदयात्रा का आयोजन करने जा रहा है. नवग्रह की शांति और पूजन के उद्देश्य से यह यात्रा हर साल की तरह इस साल भी आयोजित हो रही है. यह 5 दिवसीय यात्रा 26 दिसंबर 2024 से शुरू होगी और 30 दिसंबर 2024 को मंदिर परिसर में समाप्त होगी. खास बात यह है कि यह यात्रा नर्मदा तट को स्पर्श किए बिना पूरी होती है, जो इसे अन्य यात्राओं से अलग बनाती है.
यात्रा की शुरुआत और महत्व
इस पंचक्रोशी पदयात्रा की शुरुआत 2008 में संत डॉ. रविंद्र भारती चौरे के नेतृत्व में हुई थी. डॉ. चौरे का मानना था कि जो लोग नर्मदा परिक्रमा नहीं कर सकते, वे इस यात्रा में शामिल होकर नवग्रह की शांति और मानसिक संतुलन प्राप्त कर सकते हैं. तब से यह यात्रा लगातार हर साल आयोजित हो रही है और इसमें शामिल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है.
नौ अंक का महत्व
यात्रा में नवग्रह की महत्ता को ध्यान में रखते हुए नौ अंक का विशेष महत्व है. यात्रा के दौरान नौ स्थानों का समागम होता है, नौ संत शामिल होते हैं और नौ भजन मंडलियां भी अपनी प्रस्तुति देती हैं. नवग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के शांति पाठ के लिए यह यात्रा श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है.
यात्रा का मार्ग और पड़ाव
यात्रा में पांच पड़ाव होते हैं, जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं.
26 दिसंबर: नागझिरी स्थित संत बोंदरू बाबा की समाधि.
27 दिसंबर: उमरखली स्थित मोटी माता मंदिर.
28 दिसंबर: बड़घाट महादेव मंदिर परिसर.
29 दिसंबर: बेड़ियाव स्थित श्री संत पूर्णानंद बाबा समाधि स्थल.
30 दिसंबर: यात्रा का समापन नवग्रह मंदिर परिसर में होगा.
सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
यह यात्रा हर उम्र और समाज के लोगों को जोड़ती है. खासकर महिलाओं की संख्या अधिक रहती है. श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर शारीरिक और मानसिक शांति का अनुभव करते हैं. 5 दिनों में यह यात्रा 25 से अधिक गांवों से गुजरती है और लगभग 70 किलोमीटर का सफर तय करती है.
यात्रा का प्रभाव
यात्रा का उद्देश्य न केवल नवग्रह की शांति है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार भी करती है. यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु नवग्रहों की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.
FIRST PUBLISHED : December 24, 2024, 17:24 IST
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