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Arthritis and Lupus Disease Study: रूमेटॉइड आर्थराइटिस और ल्यूपस जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाना आसान नहीं होता है. हालांकि अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो मिनटों में इन बीमारियों का पता लगा सकती है.
नई एआई टेक्निक ऑटोइम्यून डिजीज का सटीक पता लगा सकती है.
Arthritis Diagnosis New Technology: मेडिकल साइंस में लगातार नई रिसर्च होती रहती हैं, जिनका फायदा लोगों को मिलता है. एक जमाने में बीमारियों का पता नाड़ी देखकर लगाया जाता है, लेकिन वक्त के साथ एडवांस मशीनें आ गईं. आजकल कई गंभीर बीमारियों का पता कुछ ही घंटों में लगाया जा सकता है. धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी एंडवांस हो रही है. अब एक नई टेक्निकल स्टडी में पता चला है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे- रूमेटॉइड आर्थराइटिस और ल्यूपस का तुरंत और सटीक पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
शोधकर्ताओं की मानें तो इसका फायदा हाई रिस्क वाले लोगों को ज्यादा होगा और उन्हें बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही सही ट्रीटमेंट दिया जा सकेगा. अमेरिका के पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह नई टेक्नोलॉजी डेवलप की है, जो मशीन लर्निंग का उपयोग कर ऑटोइम्यून रोगों के प्रीक्लिनिकल स्टेज में डेवलप होने की भविष्यवाणी कर सकती है. इन बीमारियों की शुरुआती पहचान अक्सर हल्के लक्षणों या खून में कुछ एंटीबॉडी के माध्यम से होती है. अगर इन्हें जल्दी पहचान लिया जाए, तो इन बीमारियों को मैनेज करने में आसानी हो सकती है.
अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा डेवलप की गई इस तकनीक को जेनेटिक प्रोग्रेसन स्कोर (GPS) कहा जाता है. यह रूमेटॉइड गठिया और ल्यूपस की प्रोग्रेस को अधिक सटीकता से भविष्यवाणी करने में मदद करता है. जीपीएस की सहायता से किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि मौजूदा मॉडल्स के मुकाबले यह तकनीक 25 से 1000 प्रतिशत ज्यादा सटीक है. खासकर हल्के लक्षणों को पहचानने में यह टेक्नोलॉजी काफी कारगर है. प्रोफेसर डेजियांग लियू के अनुसार, जीपीएस का उपयोग रोग की प्रगति का सटीक पूर्वानुमान लगाने में सहायक हो सकता है, जिससे इलाज को प्रभावी और सुविधाजनक बनाया जा सकता है.
क्या है रूमेटॉइड आर्थराइटिस?
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) एक ऑटोइम्यून डिजीज है. इस डिजीज में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हाथ और पैरों के जॉइंट्स के टिश्यूज पर अटैक करने लगता है. इससे जॉइंट्स में सूजन, दर्द और हार्डनेस आ जाती है. यह छोटे जॉइंट्स जैसे- हाथों और पैरों के अंगूठों को प्रभावित करती है, लेकिन यह बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है. समय के साथ यह सूजन हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे कंडीशन सीवियर हो सकती है. यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा होती है.
ल्यूपस कौन सी बीमारी है?
ल्यूपस (Lupus) भी एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही टिश्यूज और ऑर्गन्स पर हमला करने लगता है, जिससे सूजन, दर्द और विभिन्न अंगों का नुकसान होता है. यह बीमारी शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है. ल्यूपस के लक्षणों में थकान, बुखार, त्वचा पर लाल चकत्ते, जोड़ों में दर्द और सूजन, अंगों की कार्यक्षमता में कमी शामिल है. यह बीमारी कभी-कभी हल्की होती है, जबकि कभी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. महिलाएं इस बीमारी से अधिक प्रभावित होती हैं.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-ai-technology-will-quickly-diagnose-arthritis-and-lupus-disease-new-study-reveals-8951398.html







