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आखिर शहर के नाम पर क्यों है ‘पैग’, पंजाब के महाराजा के साथ क्या है इसका नाता



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Patiala Peg: आप चाहें शराब पीते हों या नहीं पीते हों, लेकिन आपने पटियाला पैग के बारे में जरूर सुना होगा. अगर ऐसे नहीं सुना तो बॉलीवुड के गानों में जरूर सुना होगा. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है आखिर इसे पटियाला पैग ही क्यों…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • पटियाला पैग के बारे में कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं
  • ‘पटियाला पैग’ का नामकरण महाराजा भूपिंदर सिंह द्वारा किया गया
  • पटियाला पैग में आधा गिलास पानी और आधा गिलास शराब होती है

Patiala Peg: हिंदुस्तान में कई ऐसे शहर हैं, जिनके नाम पर कुछ न कुछ मशहूर है. लेकिन पंजाब का पटियाला अकेला ऐसा शहर है जिसके नाम पर सूट (महिलाओं की ड्रेस) भी है और पैग (शराब का) भी. पटियाला पैग के बारे में कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं. पटियाला पैग को अक्सर पंजाबी संस्कृति का प्रतीक माना जाता है. पटियाला पैग का जिक्र अक्सर फिल्मों और गानों में भी किया जाता है.

पटियाला पैग हमेशा से अपनी बड़ी मात्रा के लिए जाना जाता रहा है. लेकिन कभी आपने सोचा है आखिर इसे पटियाला पैग ही क्यों बोला जाता है चंडीगढ़, भटिंडा, जयपुर, दिल्ली पैग क्यों नहीं. आज आपको बता रहे हैं कि पटियाला खास क्यों होता है और इसका पंजाब के महाराजा से और इतिहास से क्या संबंध है. पटियाला पैग की कहानी पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह की शानदार जीवनशैली और विलासिता से जुड़ी हुई है. 

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वाकई में राजसी पैग
पीने के शौकीन ज्यादातर लोग यह मानते होंगे कि पटियाला पैग कुछ खास है. यह वाकई में राजसी पैग है, जिसे 120 मिलीलीटर व्हिस्की में कुछ सोडा और बर्फ के साथ पेश किया जाता है. पटियाला पैग इस बात की गारंटी है कि इसे पीने वाला अगले दिन एक तेज हैंगओवर के साथ उठेगा. दिलचस्प बात यह है कि इसे बनाया ही इसीलिए  गया था.

असल में था ये मामला?
जीक्यू इंडिया डॉटकॉम के अनुसार पटियाला पैग की ईजाद पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के दरबार में हुई थी. महाराजा भूपिंदर सिंह ने 1900 से 1938 तक पटियाला रियासत पर राज किया था. महाराजा, आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध और विवादास्पद शख्सियतों में से एक थे. उनकी ख्याति एक असाधारण उदार मेजबान के तौर पर थी. वह अक्सर विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और खिलाड़ियों के लिए शानदार पार्टियां आयोजित करते थे. वह स्वयं एक उत्साही खिलाड़ी थे और उन्होंने 1911 में इंग्लैंड का दौरा करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की थी.

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महाराजा को हारना नहीं था पसंद
महाराजा भूपिंदर सिंह को एक चीज जो पसंद नहीं थी, वह थी हारना. महाराजा के पास सिख योद्धाओं से युक्त एक शक्तिशाली पोलो टीम थी. उन्होंने एक बार ‘टेंट पेगिंग’ के एक दोस्ताना टूर्नामेंट के लिए वायसराय प्राइड नामक एक आयरिश पोलो टीम को आमंत्रित किया था. उस समय पटियाला टीम, वायसराय प्राइड टीम के मुकाबले काफी हद तक अनुभवहीन थी. आयरिश टीम एक मजबूत, कुशल और मैच जीतने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ टीम थी. 

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बड़े पैग पिलाने की योजना
महाराजा जानते थे कि पटियाला की टीम मेहमान टीम के मुकाबले कमजोर है. यह बात जानते हुए उन्होंने एक रणनीतिक योजना तैयार की. उन्होंने अपने महल के कर्मचारियों को बड़े मैच से एक रात पहले रात के खाने में मेहमान टीम को दोगुनी मात्रा में व्हिस्की पिलाने का आदेश दिया. जैसा कि अनुमान था, आयरिश टीम के सदस्य अगली सुबह भारी हैंगओवर के साथ उठे और अपनी पूरी ताकत से नहीं खेल सके. महाराजा की टीम विजयी हुई. कहा जाता है कि जब वायसराय की टीम का राजनीतिक एजेंट महाराजा से शिकायत करने गया, तो उन्होंने यह कहकर जवाब दिया, “हां, पटियाला में हमारे पैग बड़े होते हैं.”

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ये भी किस्सा है प्रचलित
पटियाला पैग को लेकर ज्यादातर यही किस्सा प्रचलित हैं. लेकिन कुछ आधुनिक भारतीय इतिहासकारों ने दावा किया है कि आयरिश पोलो टीम के बजाय, महाराजा ने ऐसा वास्तव में ब्रिटिश क्रिकेट टीम के खिलाफ किया था. पटियाला पैग बनाने के बारे में एक और लोकप्रिय किस्सा यह है कि महाराजा को उनके डॉक्टर ने सलाह दी थी कि वे वे दिन में केवल एक गिलास ही पियें. महाराजा की अति करने की आदत को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने एक चेतावनी का पालन किया कि एक ड्रिंक चार के बराबर होगा. एक कहानी यह भी है जो दावा करती है कि महाराजा की देर से आने की प्रवृत्ति को देखते हुए, उनके मेहमानों ने बड़े पैग (पटियाला पैग) डालना शुरू कर दिया, जिसे वे इंतजार करते समय पीते रह सकते थे. 

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पटियाला पैग का आकार
पटियाला पैग का आकार सामान्य पैग से काफी बड़ा होता है. वैसे तो ये कहीं लिखा नहीं है, लेकिन शराब पीने वालों के अनुसार पटियाला पैग में करीब 120 एमएल शराब होती है. इसका मतलब पटियाला पैग में आधा गिलास पानी और आधा गिलास शराब होती है. कहा जाता है कि पहले महाराजा अपनी सबसे छोटी उंगली से लेकर इंडेक्स फिंगर तक नापकर बनाते थे. शुरुआत में ‘पटियाला पैग’ सिर्फ शाही मेहमानों को परोसा जाता था. जो बाद में पूरी दुनिया मशहूर हो गया. लेकिन अब हर खुशी के मौके पर लोग अपनी खुशी को दोगुना करने की खातिर ‘पटियाला पैग’ का लुत्फ उठाने लगे हैं..  लोग इसे किसी भी खास मौके पर पीना पसंद करते हैं. हालांकि, इसकी ज्यादा मात्रा के कारण इसे हर कोई बर्दाश्त नहीं कर पाता है. लेकिन आपको बता दें कि शराब का पैग पटियाला हो या शॉर्ट या लार्ज या फिर नीट… शराब नुकसानदायक ही होती है.


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https://hindi.news18.com/news/knowledge/why-patiala-peg-so-big-what-its-connection-with-maharaja-bhupinder-singh-8953172.html

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