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Mahamritunjai Rath Yatra : मकर संक्रांति के पहले रविवार को महेश्वर में महामृत्युंजय शिव रथयात्रा निकाली गई. खास बात यह है कि यह साल में एक बार ही निकलती है. इतना ही नहीं पूरे विश्व में सिर्फ महेश्वर में ही महामृत्युंजय शिव रथयात्रा आयोजन होता…और पढ़ें
खरगोन. रविवार 12 जनवरी को महामृत्युंजय मंत्र और शिवनाम से खरगोन की धार्मिक नगरी महेश्वर की गलियां गूंज उठी. हजारों भक्तों ने भगवान के रथ (गाढ़ा) को खींचकर पुण्य लाभ कमाया, तो वहीं, हजारों लोगों ने मां नर्मदा की काकड़ा आरती की. दरअसल, मकर संक्रांति के पहले रविवार को महेश्वर में महामृत्युंजय शिव रथयात्रा निकाली गई, जो साल में एक बार ही निकलती है. खास बात यह भी है कि पूरे विश्व में सिर्फ महेश्वर में ही महामृत्युंजय शिव रथयात्रा आयोजन होता है.
बता दें कि, वर्ष 2007 से महेश्वर (माहिष्मति) में विश्व कल्याण के उद्देश्य से महामृत्युंजय शैक्षणिक संस्था इंदौर द्वारा महामृत्युंजय शिव रथयात्रा निकल रही है. यात्रा का यह 19वां वर्ष था. जिसमें शामिल होकर सैकड़ों टन वजनी गाढ़े को खींचने के लिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से श्रद्धालुओं आए थे. दोपहर करीब 3 बजे यात्रा लक्ष्मीनारायण कॉलोनी स्थित स्वाध्याय भवन से प्रारंभ हुई जो विभिन्न मार्गों से होते हुए देर शाम नर्मदा घाट पहुंची. इस दौरान पूरे रास्ते में भक्तों द्वारा शिव भजन गाएं, गीतों पर झूमते हुए नजर आएं. वहीं, महिलाओं ने महामृत्युंजय मंत्र का सतत जाप किया.
मां नर्मदा की काकड़ा आरती
यात्रा में बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति भीरात 7:30 बजे भगवान महामृत्युंजय ने नर्मदा विहार किया. इसके पश्चात शुद्ध देशी घी से बनी 5100 बाती हाथो में लेकर 5000 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने काकड़ा आरती की. आयोजन समिति के मनोज पाटीदार ने बताया कि, \”सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे सन्तु निरामयाः\” (विश्व कल्याण) के उद्देश्य से यह यात्रा हर साल डॉ. मनस्वी एवं मानवी द्वारा निकाली जाती है. यात्रा के एक दिन पूर्व भगवान शिव की 44 उपचार से पूजा की जाती है.
इसलिए महेश्वर में निकलती है यात्रा
आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार, पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि, एक राक्षस के वध के किए भगवान शिव ने पहली बार महेश्वर में ही नंदी की सवारी की थी. महेश्वर देव भूमि कही जाती है. इसे गुप्त काशी भी कहते है. महेश्वर अध्यात्म की दृष्टि से बड़ा महत्व रखता है. आधुनिक काल में शिव की सबसे बड़ी उपासक मातोश्री अहिल्या बाई होलकर ने भी महेश्वर को अपनी राजधानी इसीलिए बनाया था. इसीलिए महामृत्युंजय शिव रथ यात्रा के लिए महेश्वर को चुना गया है.

















