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Mahabharat Katha: करुक्षेत्र युद्ध 18 दिनों तक चला था. उसमें कौरवों के पक्ष से एक ऐसा योद्धा भी लड़ रहा था, जिसके पास 12 हाथियों का बल था. वह भगवान श्रीकृष्ण का भरोसेमंद साथी था, लेकिन वह पांडवों के खिलाफ लड़ा. आइए जानते हैं उस…और पढ़ें
नारायणी सेना की कमान कृतवर्मा के हाथों में थी.
महाभारत में करुक्षेत्र का युद्ध 18 दिनों तक चला था. उस युद्ध में कौरवों के पक्ष से एक ऐसा योद्धा भी लड़ रहा था, जिसके पास 12 हाथियों का बल था. वह भगवान श्रीकृष्ण का भरोसेमंद साथी था, लेकिन वह पांडवों के खिलाफ लड़ा. इस भीषण युद्ध में सभी कौरव और अनेकों योद्धा मारे गए, लेकिन 11 योद्धा जीवित बच गए, उनमें वह भी शामिल था. दुर्योधन पक्ष के इस योद्धा को कोई पांडव नहीं मार सका. आइए जानते हैं उस योद्धा के बारे में.
युद्ध के लिए दुर्योधन ने मांगी नारायणी सेना
दुर्योधन युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगने के लिए उनके पास पहुंचा था. वहां पर अर्जुन भी थे. भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि वे जिस ओर से भी रहेंगे, युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे. इस पर दुर्योधन ने सोचा कि जब ये शस्त्र ही नहीं उठाएंगे तो इनके रहने का क्या लाभ. फिर उसने भगवान श्रीकृष्ण से युद्ध के लिए उनकी नारायणी सेना मांग ली थी.
कृतवर्मा के हाथों में नारायणी सेना की कमान
भगवान श्रीकृष्ण की नारायणी सेना की कमान कृतवर्मा के हाथों में थी. भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन को युद्ध में नारायणी सेना देने का वचन दिया था. उस अनुसार, युद्ध के प्रथम दिन कृतवर्मा नारायणी सेना लेकर दुर्योधन की ओर से लड़ने पहुंच गए.
कौन थे कृतवर्मा?
कृतवर्मा भोजराज हृदिक के बेटे थे और वे वृष्णिवंश के 7 सेनानायकों में एक थे. महाभारत के आदिपर्व के अनुसार, कृतवर्मा एक बहुत बड़े धनुर्धर थे. युद्ध से पूर्व वे भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर हस्तिनापुर गए थे. विदुर, द्रोण, पांडवों आदि से मिलकर वापस आए थे और पूरा हाल श्रीकृष्ण को बताया था.
दुर्योधन की ओर से लड़े कृतवर्मा, पांडवों को दिखाया पराक्रम
कृतवर्मा ने 18 दिनों तक महाभारत का युद्ध लड़ा. उन्होंने पांडवों को अपना पराक्रम दिखाया था. कहा जाता है कि कृतवर्मा ने अर्जुन, अभिमन्यु और सात्यकि को छोड़कर अन्य सभी पांडवों को हराया भी था. युद्ध के 14वें दिन भीम को 2 बार हराया था. चक्रव्यूह के समय कृतवर्मा ने अभिमन्यु के सभी घोड़ों को मार दिया था.
दुर्योधन का बढ़ाया हौसला, पांडवों के शिविर में लगाई आग
युद्ध के अंत में जब दुर्योधन सरोवर में छिप गया था, तब कृतवर्मा वहां गए थे और उसे युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था. भीम के हाथों दुर्योधन के मारे जाने पर अश्वत्थामा के साथ मिलकर कृतवर्मा ने पांडवों के शिविर में आग लगा दी थी.
कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद जीवित बच गए कृतवर्मा
महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद कृतवर्मा जीवित बच गए. वे उन 11 लोगों में शामिल थे, जो युद्ध में मारे नहीं गए. हालांकि काफी बाद में सात्यकि ने कृतवर्मा का वध कर दिया था.
January 17, 2025, 11:52 IST
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