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छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना और तेल से मालिश करना, उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है. तेल मालिश न केवल बच्चों की ग्रोथ में मदद करती है, बल्कि उनकी मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत बनाती है. (रिपोर्टः वंदना/…और पढ़ें
दूध पिलाने के बाद लगभग 45 मिनट तक शिशु की मालिश नहीं करें. दूध पिलाने के बीच भी शिशु की मालिश न करें. जब बच्चा कंफर्टेबल लगे और उसका पेट ज्यादा भरा न हो, तब आप मालिश कर सकते हैं.
रीवा के डॉक्टर प्रमोद जैन (शिशु विशेषज्ञ) ने Local18 को बताया कि शिशु के साथ कम्यूनिकेट करने में टच यानि की स्पर्श बहुत अहम होता है, लेकिन पेरेंट्स इस बात को समझ नहीं पाते हैं. पेरेंट्स का स्पर्श शिशु के विकास और लर्निंग के लिए भी जरूरी होता है. तेल मालिश न केवल बच्चों की ग्रोथ में मदद करती है, बल्कि उनकी मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत बनाती है. उनका कहना है कि जब तक बच्चा बोलना शुरू नहीं करता है, तब तक वो अपने आसपास की चीजों को छूकर अपनी बात कहता है.
शिशु की मालिश करने से कब्ज और पाचन मार्ग में फंसी गैस बाहर निकलती है. तेल मालिश पाचन को बढ़ावा देती है और कोलिक एवं गैस से राहत पाने में मदद करती है. अगर बच्चा चिड़चिड़ा रहता है, तो आपको उसकी मालिश करनी चाहिए. मालिश से शिशु शांत रहता है. मालिश करने से शिशु की बॉडी में ‘फील-गुड’ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे बच्चा रिलैक्स महसूस करता है.
रोज मालिश करें ताकि बच्चे को इसकी आदत हो जाए और मालिश के समय वो रोए नहीं. शिशु की मालिश साफ और हवादार कमरे में ही करें जहां आप दोनों को कोई डिस्टर्ब करने वाला न हो.
जब आप शिशु के साथ अकेले कुछ समय बिताते हैं तो आप उसे बेहतर तरीके से समझ पाते हैं. आपको समझ आ पाता है कि शिशु की क्या जरूरतें हैं और उसे कैसी देखभाल पसंद है. इस तरह शिशु आपके साथ कनेक्ट भी कर पाता है और आप दोनों के बीच का बॉन्ड मजबूत होता है.
दूध पिलाने के बाद लगभग 45 मिनट तक शिशु की मालिश नहीं करें. दूध पिलाने के बीच भी शिशु की मालिश न करें. जब बच्चा कंफर्टेबल लगे और उसका पेट ज्यादा भरा न हो, तब आप मालिश कर सकते हैं.
शिशु की मालिश के लिए आप बादाम, नारियल, राई, तील का तेल ले सकते हैं. इसकी जगह बेबी मसाज क्रीम भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन गर्मी में क्रीम का उपयोग सही रहता है. शिशु के लिए साफ तौलिया और चादर भी रखें. जरूरत पड़े तो डायपर भी रखें. जो भी शिशु की मालिश करें, उसके नाखून कटे हुए होने चाहिए ताकि शिशु को चोट न लगे और नाखून में जमा गंदगी बच्चे के शरीर में ना लगे.
Location :
Rewa,Madhya Pradesh
First Published :
January 17, 2025, 15:02 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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