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शरीर पर दिखें ऐसे दाग तो हो जाएं सावधान, ये हो सकते हैं इस गंभीर बीमारी के लक्षण! तुरंत लें एक्सपर्ट की सलाह


Agency:Bharat.one Uttar Pradesh

Last Updated:

Kannauj: साधारण सी दिखने वाली ये बीमारी कई बार घातक सिद्ध हो जाती है. अगर शरीर पर हल्के चकत्ते दिखायी दें तो इन्हें इग्नोर न करें और समय रहते इलाज कराएं. इसके लिए शहर में जागरूकत अभियान भी चलाया जा रहा है.

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यह बीमारी कर सकती है दिव्यांग बरते सावधानी

हाइलाइट्स

  • शरीर पर लाल चकत्ते दिखें तो तुरंत इलाज कराएं.
  • हेनसेन रोग से दिव्यांगता हो सकती है.
  • 30 जनवरी से 13 फरवरी तक जागरूकता अभियान.

कन्नौज: सामान्य दिखने वाली यह बीमारी आगे चलकर दिव्यांगता की समस्या पैदा कर सकती है. ऐसे में कन्नौज स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आगामी 30 जनवरी से 13 फरवरी तक विशेष हेनसेन रोग जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. डिप्टी सीएमओ डॉक्टर महेंद्र भान सिंह बताते हैं कि 3 साल की उम्र के बाद यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है. हल्के लाल रंग का चकत्ता इसकी शुरुआती पहचान होती है, लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया, तो इससे दिव्यांगता तक हो सकती है. साथ ही, हाथों-पैरों की उंगलियां टेढ़ी हो सकती हैं और कई बार गल भी सकती हैं.

कैसे होती है बीमारी, क्या है नाम
यह बीमारी साधारण तौर पर 3 साल की उम्र के बाद शुरू होती है और शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है. इसकी शुरुआत हल्के लाल रंग के चकत्ते से होती है, जो धीरे-धीरे गाढ़ा होता जाता है और उसमें सुन्नपन आ जाता है. यह बीमारी एक प्रकार के बैक्टीरिया से होती है, जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खांसने से फैलती है. इस बीमारी को हेनसेन रोग (कुष्ठ रोग) कहा जाता है. यह शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली को प्रभावित करती है, जिससे त्वचा का रंग बदलने लगता है. बाद में और भी समस्या हो सकती है.

क्या है उपाय
इस बीमारी से बचने का एकमात्र उपाय है जागरूकता और समय पर इलाज. अगर इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति समय पर इलाज करवा लेता है, तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. अगर रोगी के शरीर पर एक से पांच स्थानों पर निशान और सुन्नपन है, तो उसे ठीक होने में 6 महीने का समय लगता है. वहीं, अगर शरीर पर पांच से अधिक स्थानों पर निशान और सुन्नपन है, तो इलाज में 12 महीने का समय लग सकता है.

निशुल्क होगा इलाज, कब से कब तक चलेगा विशेष अभियान
अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी का इलाज निजी अस्पताल में कराता है, तो इसका खर्च हजारों से लेकर लाखों रुपये तक हो सकता है, क्योंकि एक समय के बाद यह बीमारी दिव्यांगता तक पहुंचा सकती है, जिससे ऑपरेशन की जरूरच पड़ सकती है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग में यह पूरा इलाज बिल्कुल निशुल्क है. आगामी 30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

क्या बोले एक्सपर्ट डॉक्टर
Bharat.one से बात करते हुए डिप्टी सीएमओ और कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. महेंद्र भान सिंह ने बताया कि यह बीमारी बहुत मामूली दिखाई देती है, लेकिन समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह आगे चलकर गंभीर हो सकती है और व्यक्ति को दिव्यांग भी बना सकती है. इससे हाथों और पैरों की उंगलियां टेढ़ी हो सकती हैं, गल सकती हैं, और घाव भी जल्दी ठीक नहीं होते.

इस बीमारी के कारण हाथों में सुन्नपन इतना बढ़ सकता है कि व्यक्ति शर्ट की बटन बंद नहीं कर पाएगा और पैरों से चप्पल निकल जाएगी, लेकिन उसे पता भी नहीं चलेगा. यह बीमारी 3 साल की उम्र के बाद किसी भी उम्र में हो सकती है. सरकारी स्वास्थ्य विभाग में इसका इलाज पूरी तरह से निशुल्क किया जाता है. आगामी 30 जनवरी से 13 फरवरी तक विशेष अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा.

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शरीर पर दिखें ऐसे दाग तो हो जाएं सावधान, ये हो सकते हैं इस बीमारी के लक्षण!

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.


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