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Food Story: लोग चटकदार खाने और नाश्ते के लिए अक्सर सही दुकान की तलाश में रहते हैं. चांपा जिले के कचहरी में बने दुकान में 12 सालों से तंदूरी समोसे की हाई डिमांड रहती है. सामान्य समोसे से छोटा और पतली परत वाला त…और पढ़ें
जांजगीर का राठौर तंदूरी समोसा
हाइलाइट्स
- करारा होता है तंदूरी समोसा का पतला परत
- जांजगीर में मशहूर है राठौर जी का तंदूरी समोसा
- 10 रुपए में मिलते हैं 4 तंदूरी समोसे
जांजगीर-चांपा. आपने होटल, रेस्टोरेंट या ठेले पर मैदे से बने नॉर्मल समोसे तो बहुत खाए होंगे, लेकिन क्या आपने तंदूरी समोसा खाया है? इसका नाम भले ही तंदूरी समोसा है, लेकिन यह भट्ठी या आग से नहीं बनता, बल्कि तेल में तला जाता है. इसकी बाहरी परत कागज जैसी पतली और खाने में एकदम करारी होती है. लोग इसे तीखी मिर्ची और मीठी चटनी के साथ बड़े चाव से खाते हैं.
10-12 सालों से बेच रहे हैं तंदूरी समोसा
जांजगीर जिला मुख्यालय में कचहरी चौक के पास राठौर जी का तंदूरी समोसा का ठेला काफी पुराना है. यहां तंदूरी समोसा मिलता है. ठेला लगाने वाले संतोष राठौर जांजगीर की पुरानी बस्ती के रहने वाले हैं और पिछले 10-12 सालों से तंदूरी समोसा बेच रहे हैं. राठौर जी का तंदूरी समोसा जांजगीर के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी मशहूर है. रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ तक के लोग इसे खरीदने आते हैं.
10 रुपए में मिलेंगे 4 तंदूरी समोसे
जांजगीर के लोग राठौर जी के तंदूरी समोसे को बहुत पसंद करते हैं. जैसे ही तंदूरी समोसा तेल से छनकर निकलता है, ग्राहक इंतजार करते खड़े रहते हैं और मिनटों में समोसे खत्म हो जाते हैं. यहां आपको 10 रुपए में 4 तंदूरी समोसे मिलते हैं, जिन्हें तीखी मिर्ची और इमली की मीठी चटनी के साथ खाने का मजा ही अलग है.
12 वर्षों से कचहरी चौक के पास लगा रहे हैं तंदूरी समोसा का ठेला लगा
राठौर तंदूरी समोसा के संचालक संतोष राठौर ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से जांजगीर के कचहरी चौक के पास तंदूरी समोसा का ठेला लगा रहे हैं. इसमें उनके बेटे सुनील राठौर भी उनकी मदद करते हैं. उन्होंने बताया कि तंदूरी समोसा नॉर्मल समोसे से साइज में थोड़ा छोटा होता है, इसकी बाहरी परत मैदे की पतली होती है और अंदर आलू का मसाला होता है. इसे खाने में करारी होती है.
रोजाना 2500 नग तंदूरी समोसा बेचते हैं
संतोष राठौर ने बताया कि वह प्रतिदिन घर से मैदे की लोई को पतला बेलकर हल्की आंच में सेकते हैं और फिर बंडल बनाकर रख लेते हैं. प्रतिदिन 2000 से 2500 नग बंडल बनाकर, 4 बजे कचहरी चौक के पास ठेले पर आते हैं. यहां बंडल से एक-एक निकालकर उसमें आलू का मसाला डालते हैं और उनके बेटे सुनील राठौर तंदूरी समोसा तलते हैं. संतोष राठौर ने बताया कि 10 रुपए में 4 नग तंदूरी समोसे देते हैं, जो तीखी मिर्ची और इमली की मीठी चटनी के साथ काफी किफायती और स्वादिष्ट होते हैं.
Janjgir-Champa,Chhattisgarh
February 15, 2025, 10:23 IST
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