Difference Between Solar and Lunar Eclipse: 29 मार्च 2025 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. इससे पहले होली के दिन 14 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था. नासा ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर 29 मार्च 2025 को लगने वाले सूर्य ग्रहण की जानकारी दी है. नासा के अनुसार, इस दिन चंद्रमा सूर्य के सामने आकर उसकी रोशनी को आंशिक रूप से ढक लेगा, जिससे उत्तरी गोलार्ध के कुछ हिस्सों पर उसकी छाया पड़ेगी. अब आप लोगों के मन के एक सवाल उठ रहा होगा, क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा? नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. आइए ऐसे सिंपल भाषा में समझते हैं सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में क्या अंतर होता है.
ग्रहण क्या होता है?
ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब कोई बड़ा खगोलीय पिंड किसी अन्य पिंड की छाया में चला जाता है या उसके और देखने वाले के बीच आ जाता है. सूर्य और चंद्र ग्रहण तब होते हैं जब सूर्य और चंद्रमा की रोशनी कुछ समय के लिए आंशिक या पूरी तरह से हमारी दृष्टि से ओझल हो जाती है.
सूर्य ग्रहण (Surya Grahan)
सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या के दिन होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है. इस दौरान चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और यह सूर्य को आंशिक या पूरी तरह से ढक लेता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण अक्सर छोटे क्षेत्र में ही दिखाई देता है, इसलिए इसे देखना दुर्लभ होता है.
सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वल्याकार सूर्य ग्रहण. पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य का कुछ हिस्सा ढकता है. वल्याकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकता और सूर्य का बाहरी भाग चमकता रहता है.
चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan)
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती, तो इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं. इस दौरान, चंद्रमा पृथ्वी की छाया (अंब्रा) के पीछे चला जाता है और उसकी सतह पर अंधेरा छा जाता है. चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे वह अंधकारमय हो जाता है और कभी-कभी कुछ घंटों तक लालिमा लिए रहता है. चंद्र ग्रहण पृथ्वी के आधे हिस्से से देखा जा सकता है.
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चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपछाया चंद्र ग्रहण. पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है और लाल या नारंगी दिखाई देता है. आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का कुछ भाग पृथ्वी की छाया में आ जाता है. उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया (Penumbra) में आता है और हल्का धुंधला दिखता है.
सूर्य और चंद्र ग्रहण में अंतर
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है, जबकि चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है. सूर्य ग्रहण दिन में होता है और यह केवल अमावस्या को दिखाई देता है, जबकि चंद्र ग्रहण रात में होता है और केवल पूर्णिमा को दिखाई देता है. सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनटों का होता है, लेकिन चंद्र ग्रहण कई घंटों तक चल सकता है. जब पृथ्वी पूरी तरह चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाती है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं.
इस स्थिति में, चंद्रमा नारंगी या लाल रंग का दिखने लगता है, ठीक वैसे ही जैसे सूरज डूबते समय आसमान लाल हो जाता है. इसे ही “ब्लड मून” कहा जाता है. चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी खास चश्मे की जरूरत नहीं होती. सूर्य ग्रहण को बिना सुरक्षा के देखना खतरनाक होता है, जबकि चंद्र ग्रहण को बिना किसी सुरक्षा के नंगी आंखों से देखा जा सकता है.
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