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Tahawwur Rana India Extradition: आतंकी तहव्वुर राणा ने अमेरिकी कोर्ट में अपनी बीमारियों का हवाला दिया था, ताकि उसे भारत को प्रत्यर्पित न किया जाए. हालांकि कोर्ट ने उसकी एक न सुनी. मुंबई हमलों का साजिशकर्ता राणा…और पढ़ें
आतंकी तहव्वुर राणा पार्किंसंस डिजीज से जूझ रहा है.
हाइलाइट्स
- मुंबई हमलों से साजिशकर्ता आतंकी तहव्वुर राणा को भारत लाया जा रहा है.
- राणा ने अमेरिकी कोर्ट में बताया था कि वह पार्किंसंस डिजीज से जूझ रहा है.
- पार्किंसंस बीमारी ब्रेन की प्रोग्रेसिव बीमारी है, जो उम्र के साथ बढ़ती रहती है.
Tahawwur Rana Diseases: मुंबई हमलों की साजिश रचने वाले आतंकी तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है. अमेरिका ने लश्कर के इस आंतकी के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ कर दिया था, जिसके बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. राणा ने पिछले साल अमेरिकी कोर्ट में अपनी बीमारियों का हवाला देते हुए भारत को प्रत्यर्पित न करने की गुहार लगाई थी. उसने कोर्ट को बताया था कि वह कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है और इसके लिए कई डॉक्यूमेंट भी अदालत में पेश किए थे. तहव्वुर राणा के दस्तावेजों के अनुसार वह कई बार हार्ट अटैक का शिकार हो चुका है और इस वक्त किडनी डिजीज के अलावा पार्किंसंस डिजीज और कॉग्निटिव डिक्लाइन से जूझ रहा है. अब सवाल है कि पार्किंसंस डिजीज क्या है और कितनी खतरनाक है?
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अतमप्रीत सिंह ने Bharat.one को बताया कि पार्किंसंस डिजीज ब्रेन से जुड़ी एक बीमारी है, जो धीरे-धीरे बढ़ती रहती है. इस बीमारी में ब्रेन के अंदर डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है. यह डिजीज ब्रेन के उस हिस्से को प्रभावित करती है, जो शरीर की एक्टिविटीज को कंट्रोल करता है. इसकी वजह से लोगों के हाथ कांपने लगते हैं, शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है और चलने की स्पीड बहुत धीमी हो जाती है. इसके अलावा पार्किंसंस के मरीजों का स्पष्ट बोलने में भी दिक्कत होने लगती है. इस बीमारी का खतरा 50-60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को अधिक होता है. पुरुषों को महिलाओं की तुलना में पार्किंसंस का रिस्क ज्यादा होता है.
डॉक्टर अतमप्रीत सिंह के अनुसार उम्र बढ़ने पर डोपामाइन बनाने वाली ब्रेन की कोशिकाएं धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. इसके साथ ही उम्र बढ़ने के साथ ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, जेनेटिक फैक्टर और न्यूरोइनफ्लेमेशन जैसी चीजें भी बढ़ती हैं. इनसे पार्किंसंस का रिस्क बढ़ जाता है. पार्किंसंस डिजीज एक प्रोग्रेसिव बीमारी है, जिसे किसी भी ट्रीटमेंट से पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन दवाओं से इस बीमारी की प्रोग्रेस को रोकने में मदद मिलती है. करीब 80% मरीजों में दवाएं असरदार होती हैं, लेकिन जिन मामलों में दवाओं का असर कम होने लगता है, तब सर्जिकल ट्रीटमेंट का सहारा लेना पड़ता है. पार्किंसंस डिजीज का पता लगाने का कोई सटीक टेस्ट नहीं होता है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को इसके लक्षण नजर आते हैं, तो इसे कंफर्म करने के लिए डॉक्टर कई चीजों का एनालिसिस करते हैं. इसके बाद ही इसका ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है.
क्या पार्किंसंस डिजीज से बचा जा सकता है? डॉक्टर की मानें तो पार्किंसंस डिजीज से बचने का कोई तरीका नहीं होता है. हालांकि अच्छी लाइफस्टाइल, बेहतर खान-पान और रेगुलर एक्सरसाइज से इसका खतरा कम किया जा सकता है. एल्कोहल का कम सेवन करने से भी इस बीमारी का रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है. इस बीमारी की फिलहाल कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. कई देशों में पार्किंसंस की वैक्सीन को लेकर रिसर्च चल रही है. अगले कुछ सालों में इसकी वैक्सीन आने की संभावना है. फिलहाल इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए कुछ दवाएं दी जाती हैं, जिन्हें दिन में 2-3 बार लेने से कई लक्षणों से राहत मिल जाती है. पार्किंसंस बीमारी तुरंत जानलेवा नहीं होती है, लेकिन यह एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जो समय के साथ शरीर की मूवमेंट को बहुत प्रभावित कर सकती है. यह बीमारी जिंदगी को मुश्किल बना देती है. अगर इसका सही इलाज और देखभाल न हो तो इससे जुड़ी जटिलताएं कॉम्प्लिकेशंस जानलेवा साबित हो सकती हैं.
अब सवाल है कि कॉग्निटिव डिक्लाइन (Cognitive Decline) क्या होता है? डॉक्टर अतमप्रीत सिंह ने बताया कि कॉग्निटिव डिक्लाइन का मतलब है कि दिमाग की सोचने, याद रखने, निर्णय लेने और एकाग्रता जैसी क्षमताओं में धीरे-धीरे गिरावट आना. यह उम्र बढ़ने के साथ एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन जब यह डेली रूटनी को बुरी तरह प्रभावित करने लगे, तो यह किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी जैसे डिमेंशिया या अल्जाइमर का संकेत भी हो सकता है. शुरुआती लक्षणों में चीजें भूल जाना, बात करते वक्त शब्द भूलना, निर्णय लेने में कठिनाई या एक ही बात बार-बार पूछना शामिल हो सकते हैं. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-mumbai-attack-terrorist-tahawwur-rana-patient-of-parkinson-disease-know-all-about-this-illness-9165288.html

















