Ramayana Katha: भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था और अपने जीवन कअंतिम समय में जब उन्हें बैकुण्ठ लोक जाना था, तब उन्होंने अयोध्या के एक पवित्र घाट पर जाकर सरयू नदी में जल समाधि ली थी. यह वही सरयू नदी है जिसने श्रीराम के जन्म से लेकर उनकी वैकुण्ठ यात्रा तक की पूरी लीला देखी थी. यही कारण है कि अयोध्या नगरी को सभी तीर्थ स्थानों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. हालांकि सरयू नदी में भगवान राम की जल समाधि को लेकर 2 कथाएं बेहद प्रचलित हैं. आइए जानते हैं उसके बारे में.
राजा दशरथ के घर हुआ था जन्म
भगवान राम का जन्म त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ के घर हुआ था. वे भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे और उनकी पत्नी माता सीता, देवी लक्ष्मी का अवतार थीं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने रावण के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए राम के रूप में अवतार लिया.
सीता माता के जाने के बाद राम ने ली जल समाधि
जब भगवान राम ने माता सीता को रावण से मुक्त कराने के बाद भी उन्हें छोड़ दिया, और उन्होंने अग्नि परीक्षा से अपनी पवित्रता साबित करने के बाद भी, उन्हें वनवास भेज दिया. तब माता सीता ने धरती में समाकर थल समाधि ले ली. सीता माता के जाने से भगवान राम बहुत दुखी हो गए. फिर उन्होंने यमराज से अनुमति लेकर अयोध्या की सरयू नदी के गुप्तार घाट पर जल समाधि ले ली.
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लक्ष्मण से अलग होने के बाद राम ने ली जल समाधि
एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार यमराज साधु के रूप में अयोध्या आए और श्रीराम से अकेले में कुछ जरूरी बातें करने की इच्छा जताई. उन्होंने एक शर्त रखी कि बातचीत के दौरान अगर कोई अंदर आया तो उसे मृत्युदंड मिलेगा. श्रीराम ने यह बात मान ली और अपने छोटे भाई लक्ष्मण को दरवाजे की निगरानी करने को कहा.
इसी दौरान ऋषि दुर्वासा वहां पहुंचे और श्रीराम से मिलने की ज़िद करने लगे. लक्ष्मण ने उन्हें रोका तो वे क्रोधित हो गए और श्राप देने की धमकी दी. मजबूर होकर लक्ष्मण ने उन्हें अंदर जाने दिया. इससे यमराज और राम की बातचीत टूट गई और श्रीराम को अपनी बात का पालन करना पड़ा. उन्होंने लक्ष्मण को राज्य से निष्कासित कर दिया.
लक्ष्मण ने यह मानकर कि उनका जीवन अब व्यर्थ है, सरयू नदी में जाकर जल समाधि ले ली. इससे श्रीराम बहुत दुखी हुए और उन्होंने भी उसी सरयू नदी में जल समाधि लेने का निश्चय किया. इस दौरान हनुमान, जामवंत, सुग्रीव, भरत, शत्रुघ्न आदि सभी वहां मौजूद थे.
हनुमान जी को दिया पृथ्वी पर रुकने का आदेश
जब हनुमान जी ने भगवान राम से प्रार्थना की कि वे उन्हें भी अपने साथ ले चलें, तब भगवान राम ने उन्हें समझाया, “हनुमान, तुम्हें कलियुग तक पृथ्वी पर रहना है. तुम्हारा काम है मेरे भक्तों की रक्षा करना.”
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अंतिम क्षणों में भगवान राम ने दिखाया विष्णु रूप
जैसे ही भगवान राम सरयू जल में प्रविष्ट हुए, उन्होंने अपना असली विष्णु स्वरूप प्रकट किया. उस समय ब्रह्मा जी ने उन्हें प्रणाम किया और 33 कोटि देवताओं को पुनः उनके दिव्य स्वरूपों में लौटाने का वचन दिया. इसके बाद भगवान श्रीराम सरयू जल में लीन हो गए और बैकुण्ठ चले गए.







