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bone strength treatment। हड्डियों को मजबूत करने के उपाय


Bone strength treatment: हम सब चाहते हैं कि हमारी हड्डियां हमेशा मजबूत रहें, ताकि बढ़ती उम्र में भी हम एक्टिव, फिट और हेल्दी रह सकें. खासकर आजकल की लाइफस्टाइल में जहां डाइट में कैल्शियम की कमी और फिजिकल एक्टिविटी का लेवल काफी कम हो गया है, वहां हड्डियों का जल्दी कमजोर होना बड़ी प्रॉब्लम बन गया है. लेकिन अब साइंस ने एक बड़ी उम्मीद दिखाई है. जर्मनी की Leipzig University के साइंटिस्ट्स ने एक ऐसा रिसेप्टर खोज निकाला है जो हड्डियों की मजबूती की चाबी बन सकता है. इस रिसेप्टर का नाम है GPR133 और इसे एक्टिवेट करने के लिए उन्होंने AP503 नाम का नया कंपाउंड तैयार किया है. रिसर्च में पाया गया कि यह कंपाउंड न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है बल्कि पहले से कमजोर हड्डियों को भी रिवर्स कर सकता है. यानी अब बढ़ती उम्र में हड्डियों का कमजोर होना रुक सकता है और जिन लोगों को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस है, उन्हें भी फायदा हो सकता है. यह खोज दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है.

हड्डियों की समस्या कितनी बड़ी है
ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का कमजोर होना आज ग्लोबल हेल्थ इश्यू बन चुका है. सिर्फ जर्मनी में ही लगभग 60 लाख लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं. भारत में भी 50 साल से ऊपर की महिलाओं में हर तीन में से एक महिला ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित पाई जाती है. बढ़ती उम्र, हार्मोनल बदलाव, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, धूप की कमी और जंक फूड जैसी आदतें हड्डियों को और कमजोर कर देती हैं. ऐसे में सुरक्षित और लंबे समय तक असर करने वाली दवाओं की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की जा रही थी.

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रिसर्च में कैसे मिली सफलता
Leipzig University के रिसर्चर्स ने इस रिसेप्टर पर करीब दस साल से काम किया है. उन्होंने पाया कि जब GPR133 सही से काम नहीं करता, तो चूहों में जल्दी बोन लॉस होने लगता है. लेकिन जैसे ही उन्हें AP503 दिया गया, उनकी हड्डियां न सिर्फ बच गईं बल्कि पहले से ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो गईं. यह कंपाउंड हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं (osteoblasts) को एक्टिव करता है और हड्डी तोड़ने वाली कोशिकाओं (osteoclasts) की एक्टिविटी को कंट्रोल करता है. यानी शरीर खुद हड्डियों की रिपेयर और रीबिल्डिंग शुरू कर देता है.

महिलाओं के लिए बड़ी राहत
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हड्डियों की डेंसिटी तेजी से घटने लगती है. इससे फ्रैक्चर का रिस्क बढ़ जाता है और हेल्थ पर बड़ा असर पड़ता है. AP503 के जरिए इस गिरती हड्डी की मजबूती को रोका जा सकता है. रिसर्चर्स का मानना है कि इसे प्रिवेंटिव मेडिसिन के तौर पर भी यूज किया जा सकता है ताकि हेल्दी लोगों की हड्डियां और ज्यादा स्ट्रॉन्ग रहें और उम्र बढ़ने पर भी वे एक्टिव रह सकें.

मसल्स भी होंगे मजबूत
Leipzig University की टीम ने इससे पहले यह भी पाया था कि AP503 स्केलेटल मसल्स को भी स्ट्रॉन्ग करता है. यानी एक ही कंपाउंड से हड्डियों और मसल्स दोनों की मजबूती बढ़ सकती है. यह एजिंग पॉपुलेशन के लिए डबल बेनिफिट साबित होगा क्योंकि बढ़ती उम्र में मसल्स भी कमजोर हो जाते हैं और बैलेंस खोने से गिरने का खतरा बढ़ता है.

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आने वाले समय में क्या होगा
रिसर्च टीम अभी इस कंपाउंड के ऊपर और स्टडी कर रही है. उनका फोकस है यह समझना कि GPR133 का शरीर पर और क्या असर पड़ता है और किन-किन बीमारियों में यह मदद कर सकता है. अगर ह्यूमन ट्रायल्स में भी यह कंपाउंड सेफ और असरदार साबित होता है तो आने वाले समय में ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डी से जुड़ी कई बीमारियों का इलाज आसान और ज्यादा असरदार हो जाएगा.

यह खोज सिर्फ एक दवा से ज्यादा है, यह लाखों लोगों की जिंदगी को बदलने का रास्ता खोल सकती है. बढ़ती उम्र में हड्डियों और मसल्स की मजबूती बनाए रखना अब मुश्किल नहीं रह जाएगा. यह उन लोगों के लिए भी उम्मीद है जो पहले से बोन लॉस से जूझ रहे हैं और हेल्दी लाइफ जीना चाहते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


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