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पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि अंगूठी से मांग भरने की परंपरा सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि विश्वास, ऊर्जा, प्रेम और जीवन भर साथ निभाने के वादे का प्रतीक है. यह रिश्ते की पवित्रता, एक दूसरे के प्रति सम्मान और समाज में वैवाहिक जीवन की पहचान को दर्शाता है.

हिंदू धर्म में मांग भरने की रस्म को विवाह का सबसे पवित्र क्षण माना जाता है. जब दूल्हा अंगूठी की मदद से दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, तो यह सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि आजीवन साथ निभाने का वचन होता है. इस रस्म की जड़ें हजारों साल पुरानी संस्कृति से जुड़ी हैं जिसमें सिंदूर को वैवाहिक जीवन की पहचान और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है.

हिंदू धर्म में अंगूठी को ग्रहों और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. विशेष रूप से अनामिका उंगली को प्रेम और रिश्तों का प्रतिनिधित्व करने वाली माना जाता है. जब इसी उंगली की अंगूठी से मांग में सिंदूर भरा जाता है, तो माना जाता है कि वह सिंदूर भावनात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लेकर दुल्हन के जीवन में प्रवेश करता है. यह न सिर्फ दो लोगों का मिलन है बल्कि दो परिवारों का भी पवित्र बंधन होता है.

सिंदूर में लाल रंग ऊर्जा, प्रेम, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा लाल रंग मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है जो वैवाहिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है. अंगूठी से सिंदूर भरना इस ऊर्जा को नियंत्रित करके दुल्हन की मांग तक पहुंचाने का माध्यम माना गया है. इस परंपरा में ग्रहों की स्थिति, ऊर्जा और शुभ समय का विशेष ध्यान रखा जाता है.
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मांग हमारे शरीर का वह हिस्सा है जहां ‘अज्ञान चक्र’ स्थित होता है जिसे जीवन के निर्णयों और भावनाओं का केंद्र माना जाता है. जब इस चक्र पर अंगूठी से सिंदूर लगाया जाता है तो यह मानसिक संतुलन, शांति और सकारात्मक सोच को बढ़ाता है. यह माना जाता है कि इससे दुल्हन का मन वैवाहिक जीवन के नए अनुभवों के लिए तैयार होता है और उसे मानसिक मजबूती मिलती है.

अंगूठी से मांग भरना सम्मान और समानता का भाव भी दर्शाता है. यह इस बात का प्रतीक है कि दूल्हा सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि प्यार, सम्मान और सुरक्षा देने का वचन देता है. अंगूठी एक गोल आकार की होती है जो अनंत प्रेम और बिना किसी अंत वाले रिश्ते को दर्शाती है. इसीलिए, इससे सिंदूर भरने का अर्थ होता है कि यह रिश्ता जीवन भर बिना टूटे कायम रहेगा.

धार्मिक मान्यता है कि अंगूठी से सिंदूर भरना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के आशीर्वाद का प्रतीक है. विवाह के दौरान मंत्रों के बीच यह रस्म इसलिए कराई जाती है, ताकि वर-वधू को देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो. यह माना जाता है कि इस क्षण से नवविवाहित जोड़े के जीवन में सौभाग्य, धन, स्वास्थ्य और प्रेम का आगमन होता है. इसी कारण चारों दिशाओं से आशीर्वाद लिया जाता है.

आज के आधुनिक समय में भी अंगूठी से मांग भरने की परंपरा कायम है, क्योंकि इसके पीछे सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि भावनात्मक और वैज्ञानिक महत्व भी है. यह दूल्हा-दुल्हन के जीवन का सबसे भावुक पल होता है जिसे कैमरे में कैद करके यादगार बनाया जाता है. सोशल मीडिया हो या परिवार की एलबम, इस पल को सबसे खास माना जाता है. इसीलिए इसे विवाह की मुख्य रस्मों में सर्वोपरि स्थान मिला है.

















