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सीतामढ़ी में यूं तो कई हनुमान मंदिर मौजूद हैं. लेकिन इनमें से 5 काफी प्रसिद्ध है. कहीं मनोकामना पूरी होने पर भक्त गाजे-बाजे के साथ पहुंचते हैं तो कहीं पूजा के लिए वाहन चालकों की भीड़ लगी रहती है. एक मंदिर तो स्टेशन वाले हनुमान जी के नाम से फेमस है.

मां जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी के कोट बाजार स्थित सिद्धपीठ दक्षिणमुखी हनुमान जी की महिमा अद्भुत और कल्याणकारी मानी जाती है. लगभग 175 वर्ष पूर्व अयोध्या के एक संत को स्वप्न में दर्शन देकर हनुमान जी ने अपनी प्रतिमा सीतामढ़ी में प्रतिष्ठित कराने का निर्देश दिया. बाद में पंडित बलदेव शर्मा गंगावत ने प्रतिमा को यहां स्थापित किया.

आज सिद्धपीठ दक्षिणमुखी हनुमान जी के प्रति लोगों की आस्था निरंतर बढ़ती जा रही है. रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को लंबी कतारें लग जाती हैं. भक्तों का मानना है कि यहां मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं. हनुमान जी की दिव्य उपस्थिति पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.

हनुमान जी के प्रतिष्ठित होने के बाद कई बार मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद अभी भव्य स्वरूप में सामने हैं. हनुमान मंदिर से करीब चार सौ गज की दूरी पर स्थित है रजत द्वार. जानकी मंदिर से चरणामृत तैयार कर के श्रीराम-जानकी के सेवक हनुमान जी को यहां लाकर चरणामृत का भोग लगाया जाता है. इसी तरह जानकी मंदिर में आराध्य की आरती के बाद श्री राम-जानकी भक्त यहां आकर श्री हनुमान जी की आरती करते हैं. मां जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी में सिद्धपीठ श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी के प्रति लोगों में काफी आस्था है.
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सीतामढ़ी के डुमरा जिलामुख्यालय स्थित हनुमान मंदिर बेहद प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. यहां अधिकारी, सरकारी कर्मी और आसपास के गांवों के लोग नियमित रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सामान्य दिनों में भी भीड़ रहती है, जबकि मंगलवार को श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. मनोकामना पूर्ण होने पर लोग गाजे-बाजे के साथ हनुमान आराधना कराते हैं. प्रत्येक मंगलवार किसी न किसी भक्त द्वारा विशेष पूजा होती है, हालांकि शनिवार और अन्य दिनों में भी आराधना का क्रम जारी रहता है.

रुन्नीसैदपुर स्थित प्राचीन संकटमोचन हनुमान मंदिर वर्षों से वाहन चालकों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ बस, ट्रक और ऑटो चालक भी यहां नियमित रूप से दर्शन करते हैं. सामान्य दिनों में भी भीड़ रहती है, जबकि मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, जिससे मंदिर परिसर में विशेष माहौल बन जाता है.

रीगा मिल बाजार स्थित हनुमान मंदिर क्षेत्र का ख्यातिप्राप्त पूजा स्थल है. रीगा चीनी मिल के कर्मचारी बिना दर्शन किए काम शुरू नहीं करते, जबकि आसपास के दुकानदार भी यहां गहरी आस्था रखते हैं. बड़े बाजार होने के कारण आसपास के कई गांवों से लोग यहां पहुंचते हैं. शनिवार, मंगलवार और गुरुवार को मंदिर में विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है.

सीतामढ़ी शहर के रिंग बांध स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. हर मंगलवार यहां भारी भीड़ उमड़ती है. खासकर इस क्षेत्र के डॉक्टर और व्यापारी अपने दिन की शुरुआत पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन से ही करते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां आशीर्वाद लेने से कार्य सफल होते हैं और मन को शांति मिलती है.

सीतामढ़ी के मेजरगंज प्रखंड के मुबारकपुर स्थित सुदर्शन आश्रम परिसर में 41 फीट ऊंची विशाल हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है. करीब दस वर्ष पूर्व बने इस मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को भारी भीड़ उमड़ती है. आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिसके कारण यह स्थान इन दिनों अत्यंत चर्चित बन गया है.

जनकपुर रोड रेलवे स्टेशन स्थित हनुमान मंदिर स्थानीय लोगों के बीच “स्टेशन वाले हनुमान जी” के नाम से प्रसिद्ध है. यात्रियों से लेकर आसपास के निवासियों तक, सभी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सामान्य दिनों में भी भीड़ रहती है, जबकि मंगलवार को श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मंदिर परिसर में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहता है.

वैसे बात करें तो सीतामढ़ी में कई अन्य हनुमान मंदिर है. जिसका काफी महत्व है और अलग-अलग महत्वाओं से सभी हनुमान मंदिरों को लोग जानते हैं. जहां माता जानकी से जोड़कर भी देखा जाता है.







