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अयोध्या: हिंदू धर्म में साल का 12 महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ठीक उसी तरह मार्गशीर्ष का माह बेहद पावन होता है. यह महीना भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना के लिए समर्पित होता है. 6 नवंबर से शुरू हुए इस महीने का समापन 4 दिसंबर को होगा. ऐसे में जानते हैं इस महीने क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.

धार्मिक दृष्टि से मार्गशीर्ष का माह भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान श्री कृष्ण को समर्पित होता है. इस महीने पूजा पाठ भजन कीर्तन और दान पुण्य करने का विशेष महत्व होता है. इस महीने कुछ नियमों का पालन करने से श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा भी रहती है.

अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि मार्गशीर्ष के महीने में विशेष कर भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना करनी चाहिए. इस महीने में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुछ चीजों को करने से बचना चाहिए. कहा जाता है अगर आप नियमित रूप से पालन करते हैं, तो जीवन की समस्त मनोकामना सिद्ध होती है.

मार्गशीर्ष के महीने में विधि विधान पूर्वक भगवान श्री कृष्णा और भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा आराधना करनी चाहिए , पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए. ऐसा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. तुलसी के पौधे की पूजा आराधना नियमित रूप से करनी चाहिए. दीपक जलाना चाहिए ऐसा करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है
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इस पूरे महीने गीता का पाठ करना चाहिए. गरीब जरूरतमंद लोगों को अन्य, वस्त्र और गुड़ कंबल अथवा तिल का दान करना चाहिए. ऐसा करने से सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं. इस महीने विशेष कर शंख बजाना चाहिए. ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है .

भूल कर भी मार्गशीर्ष महीने में मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए, सात्विक और ताजा भोजन ही ग्रहण करना चाहिए इस पवित्र महीने में किसी के प्रति क्रूरता नहीं करनी चाहिए. सात्विक विचार रखना चाहिए मधुर वाणी बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल करना चाहिए. तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखना चाहिए. ऐसा करने से श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है .







