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Mokshada Ekadashi 1 December 2025 Vrat Vidhi and Importance

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Mokshada Ekadashi 2025 Vrat Vidhi: ज्योतिषाचार्य डॉक्टर धीरज कुमार झा बताते हैं कि अगहन मास के शुक्ल पक्ष एकादशी को मोक्ष एकादशी के रूप में जाना जाता है. इसकी एक विशेषता है कि इस एकादशी को करने वाले मोक्ष की प्राप्ति को स्वीकार करते हैं. उनको विशेष फल की प्राप्ति होती है. जैसे कि उनके मन वांछित फल, संतान की प्राप्ति और व्यापार में सफलता की प्राप्ति होती है.

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दरभंगा: अगहन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है. इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु के चरणों में स्थान मिलता है. इस वर्ष मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 को पड़ेगी. आइए जानते हैं इसका महत्व और मनचाहा फल पाने की पूजा विधि.

मोक्षदा एकादशी क्यों होती है खास?
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर धीरज कुमार झा के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का पालन करने से जीवन के कई कष्ट दूर होते हैं. व्रती को मनचाहा फल, संतान सुख और व्यापार में सफलता मिल सकती है. यह व्रत पापों से मुक्ति का भी मार्ग माना गया है. धर्म ग्रंथों में लिखा है कि इस एकादशी का प्रभाव इतना शुभकारी है कि इससे पूर्वजों को भी मुक्ति मिल सकती है.

एकादशी के नियम क्या हैं?
मोक्षदा एकादशी का व्रत करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है. इस दिन चावल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. जो व्रत न करें, उन्हें भी चावल खाने से परहेज रखना चाहिए. व्रत करने वाले लोग पूरे श्रद्धा और निष्ठा के साथ नियमों का पालन करें. व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है. इस वर्ष धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोमूत्र से शुद्धिकरण का विशेष महत्व बताया जा रहा है.

कौन करता है यह व्रत?
मोक्ष की इच्छा रखने वाले, व्यापार में बाधा दूर करने वाले और संतान कामना वाले लोग यह व्रत विशेष रूप से करते हैं. माना जाता है कि यदि परिवार का कोई सदस्य व्रत न कर पाए, तो घर के अन्य सदस्य उसके फायदे के लिए व्रत कर सकते हैं.

मोक्ष का मार्ग खोलती है एकादशी
इस व्रत को करने वाले व्यक्ति का जीवन अधिक शांत, पवित्र और सुखमय माना जाता है. भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. मोक्षदा एकादशी का पालन कर भक्त अपने जीवन को सद्गति की ओर आगे बढ़ाते हैं. यही कारण है कि इसे पुण्य और उद्धार की एकादशी कहा जाता है.

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कष्ट होंगे दूर, मिलेगा मनचाहा फल! अगहन मास की मोक्षदा एकादशी पर करें ये नियम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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