Teen Mental Health Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां 11वीं की एक छात्रा ने घर के कमरे में फांसी लगाकर सुसाइड कर ली. यह खौफनाक कदम उठाने से पहले छात्रा ने 2 पेंटिंग बनाईं. एक पेंटिंग में पहाड़ों के चित्र के साथ डूबता हुआ सूरज दिख रहा है और दूसरी पेंटिंग में खुद छात्रा बाय-बाय करती दिख रही है. परिवार के लोग अपने काम पर गए थे, तभी छात्रा ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया. पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि छात्रा की आत्महत्या की वजह तनाव हो सकता है. अब तक ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर टीनएजर्स तक तनाव, एंजायटी और डिप्रेशन के कारण मौत को गले लगा रहे हैं. अब सवाल है कि कम उम्र में इस तरह के खौफनाक कदम की क्या वजह हो सकती हैं? चलिए इस बारे में एक्सपर्ट से समझने की कोशिश करते हैं.
इंदौर की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट और I Hear You की फाउंडर नेहल बंसल ने Bharat.one को बताया कि छात्रा की पेंटिंग्स से पता चल रहा है कि वह शांति चाहती थी. सूर्यास्त और सूर्योदय वाला परिदृश्य शांति और राहत को दर्शाता है. दूसरी पेंटिंग की बात करें, तो किसी व्यक्ति का पीछे से चित्र बनाना अनदेखा या अनसुना महसूस करने का संकेत हो सकता है. किशोरावस्था में लोग अक्सर खुद का पीछे से चित्र बनाते हैं, जब उन्हें लगता है कि उन्हें गलत समझा जा रहा है, अनदेखा किया जा रहा है या परिवार और दोस्तों से अलग हो गए हैं. यह दर्शाता है कि वे अब दुनिया से मुंह मोड रहे हैं और कोशिश करते-करते थक गए हैं. इस पेंटिंग में आप चेहरा नहीं देख सकते और यह भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई का संकेत हो सकता है. कई लड़कियां चिंतित होने पर अपने बालों की चोटी बनाती हैं, क्योंकि इससे उन्हें व्यवस्थित महसूस होता है.
कम उम्र में क्यों बढ़ रही मेंटल प्रॉब्लम्स?
साइकोलॉजिस्ट ने बताया कि कम उम्र में मेंटल प्रॉब्लम्स की कई वजह हो सकती हैं. आजकल घरों का एनवायरनमेंट बदल गया है और सोशल मीडिया का एक्सेस बढ़ गया है. सोशल मीडिया पर बच्चे बहुत सी ऐसी चीजें पढ़ लेते हैं, जिसके बारे में किसी से खुलकर बात नहीं कर पाते हैं. टीनएजर्स अपने स्ट्रेस को लेकर पेरेंट्स से बात नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से एंजायटी की नौबत आ जाती है. बच्चों में आजकल एग्जाम का प्रेशर होता है, करियर का दबाव होता है और कई बार रिलेशनशिप का भी एंगल होता है. घर में पेरेंट्स के साथ थिंकिंग गैप भी हो गया है, जिसकी वजह से वे कंफर्टेबल फील नहीं करते हैं. इसके अलावा स्कूल का एनवायरनमेंट भी अफेक्ट करता है. कोई बच्चा अकेला बैठा रहता है और इस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है.
एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों और टीनएजर्स में मेंटल प्रॉब्लम्स की 3 मुख्य वजह हो सकती हैं. पहला रिलेशनशिप का एंगल हो सकता है. कोई बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हो और उसका ब्रेकअप हो जाए, तो मेंटल हेल्थ बिगड़ सकती है. करियर का स्ट्रेस हो, तब समस्याएं पैदा हो सकती हैं. टीनएज में बच्चे अपने लुक्स को लेकर परेशान हो जाते हैं. कई बार बॉडी शेमिंग का शिकार हो जाते हैं. सोशल मीडिया पर बच्चे ट्रोल हो जाते हैं. इसका असर भी बच्चों के दिमाग पर बुरी तरह पड़ता है. ऐसे में बच्चों पर पेरेंट्स को विशेष नजर रखनी चाहिए. किसी भी तरह का वॉर्निंग साइन दिखने पर मेडिकल प्रोफेशनल की हेल्प लेनी चाहिए.
कैसे करें बच्चों की समस्याओं की पहचान?
साइकोलॉजिस्ट की मानें तो अगर घर या स्कूल में बच्चा अकेला बैठा है, रात में नींद न आने की समस्या हो रही है, हार्टबीट अचानक बढ़ रही है, हाथ पैर कांप रहे हैं या बहुत डर लग रहा है, तो ये मेंटल प्रॉब्लम के वॉर्निंग साइन हो सकते हैं. कई बार बच्चों को फोबिया हो जाता है, जिससे डर लग सकता है. कई बार बच्चों का हैरेसमेंट होता है, जिसके बारे में बच्चा बात नहीं कर पाता है. इसकी वजह से भी मेंटल हेल्थ बर्बाद होती है और सीवियर मामलों में बच्चे सुसाइड जैसा खौफनाक कदम उठा लेते हैं.
बच्चों को इन समस्याओं से कैसे बचाएं?
नेहल बंसल ने बताया कि बच्चे की मेंटल हेल्थ न बिगड़े, इसके लिए पेरेंट्स को खास नजर रखनी चाहिए. अगर बच्चा किसी भी परेशानी में दिखे, तो पेरेंट्स को उससे खुलकर बात करनी चाहिए. कई बार स्ट्रेस और एंजायटी से बच्चा परेशान होता है और उसके पास बात करने वाला कोई नहीं होता है. ऐसी कंडीशन में वह अकेला महसूस करता है और सुसाइड जैसे खौफनाक कदम भी उठा लेता है. वॉर्निंग साइन दिखने पर पेरेंट्स को प्रोफेशनल्स की हेल्प लेनी चाहिए. बच्चे को किसी तरह की दिक्कत हो, तो मेंटल हेल्थ काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट की मदद लेनी चाहिए. कई बार टॉक थेरेपी से समस्या हल हो जाती है.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-11th-class-student-suicide-in-indore-after-drawing-painting-expert-reveals-signs-of-mental-problems-ws-n-9917616.html







