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कांतारा में बुता-कोला परंपरा, पंजुरली दैव और कर्नाटक की सांस्कृतिक आस्था को बहुत सम्मान के साथ दिखाया गया है, क्योंकि यह स्थानीय लोगों की पहचान और विश्वास से जुड़ी परंपरा है. ऐसे में जब रणबीर सिंह की एक टिप्पणी को इस दैवी परंपरा का मजाक समझा गया, तो दक्षिण भारत के कई लोगों में नाराजगी दिखी. उनके लिए यह सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चलती आ रही श्रद्धा और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
कांतारा फिल्म में दिखाई गई पंजुरली देवता का रणबीर सिंह ने मजाक बनाया, जिसके बाद उन्हें खूब ट्रोल किया गया. लोगों का गुस्सा देख उन्होंने माफी भी मांगी. पंजुरली देवता का दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक (तुलु नाडु) की लोक संस्कृति और आस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यहां इन्हें गांव, जंगल और फसल की रक्षा करने वाले रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है. पंजुरली का रूप सुअर (वराह) जैसा माना जाता है और इन्हें भगवान विष्णु के वराह अवतार से जुड़ा हुआ माना जाता है. तुलु समुदाय में भूत कोला नाम के परंपरागत नृत्य और अनुष्ठान में पंजुरली की पूजा होती है, जहां स्थानीय लोग देवता का आशीर्वाद और संरक्षण प्राप्त करते हैं.
कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में लोगों का विश्वास है कि पंजुरली देवता जंगलों, खेतों और परिवारों की रक्षा करते हैं. यहां के ग्रामीण मानते हैं कि जब फसल को कोई खतरा होता है या गांव में कोई संकट आता है, तो पंजुरली देवता उनकी रक्षा करते हैं. इसलिए इन्हें “ग्रामीण रक्षक देवता” भी कहा जाता है. हिंदू मान्यता में भगवान विष्णु का एक प्रमुख अवतार है वराह. कहा जाता है कि वराह ने पृथ्वी माता को समुद्र से बाहर निकाला था. दक्षिण भारत की लोककथाओं में पंजुरली को इसी वराह अवतार का रूप या उनसे उत्पन्न दिव्य शक्ति माना जाता है. इसलिए लोग इन्हें विष्णु की शक्ति मानकर आदर देते हैं.
पंजुरली देवता की कहानी
लोककथाओं की माने तो वराह के कई पुत्र थे, जिनमें से एक छोटा बच्चा कमजोर और भूखा था. माता पार्वती ने उस शिशु पर दया की और उसकी देखभाल की. बड़ा होने पर वह वराह रूप में ताकतवर तो हुआ, लेकिन उसके स्वभाव में उग्रता आ गई. उसने खेतों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया, जिससे लोग परेशान हो गए. भगवान शिव उसे दंड देने वाले थे, लेकिन पार्वती की विनती पर उन्होंने उसे मारने की बजाय पृथ्वी पर भेज दिया. यहां आने के बाद उसने मनुष्यों और फसलों की रक्षा करना शुरू किया और यहीं से वह “पंजुरली देवता” कहलाए.
गुलिगा देवता कौन हैं?
कांतारा में एक और देवता का जिक्र होता है- गुलिगा. कथा के अनुसार, महादेव से उत्पन्न गुलिगा का स्वभाव भी उग्र था. अंततः उन्हें भी पृथ्वी पर भेजा गया ताकि वे मानवों और फसल की सुरक्षा करें. लोक परंपरा में उन्हें भी महत्वपूर्ण रक्षक देवता माना जाता है.
अब जानते हैं भूत कोला परंपरा के बारे में…
तुलु नाडु में भूत कोला एक बहुत पुरानी लोक-परंपरा है. इसमें नर्तक पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं. देवता का आह्वान किया जाता है और माना जाता है कि देवता नर्तक के शरीर में प्रवेश करते हैं और फिर देवता ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हैं और आशीर्वाद देते हैं. कांतारा फिल्म में भी इसी परंपरा को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है. कुल मिलाकर, पंजुरली और गुलिगा देवता सिर्फ लोककथाओं के किरदार नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक जड़ों, प्रकृति और आस्था का प्रतीक हैं. कांतारा ने इस परंपरा को दुनिया के सामने और भी खूबसूरती से रखा है.







