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Panipat psycho-aunty-kills 4 children | पानीपत की साइको महिला ने 4 बच्चे को मौत का घाट उतारा,

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Psycho killer Aunty Kills 4 Child: सुंदर मासूमों को देखते ही उसपर प्यार उमड़ पड़ता है लेकिन क्या कोई किसी खूबसूरत बच्चों को मार सकता है. यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि पानीपत में एक साइको किलर आंटी ने 4 बच्चों को पानी में डुबोकर मौत के घाट उतार दिए. मनोविज्ञान की भाषा में सीवर साइकोसिस, डेल्यूजनल डिसॉर्डर, पैथोलॉजिकल इंवी जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं. लेकिन सवाल है कि यदि इस तरह के साइको किलर लोग हमारे समाज में हो तो उसकी पहचान कैसे करनी चाहिए ताकि अपने बच्चों को बचाया जा सके. इसके लिए हमने मशहूर साइकोलॉजिस्ट डॉ. अरुणा ब्रूटा से बात की.

बेटे सहित 4 मासूमों की हत्या करने वाली साइको चाची की दरिंदगी के पीछे क्या कारणसाइको किलर आंटी की विकृत मानसिकता के पीछे का कारण.

Psycho killer Aunty Kills 4 Child: कोई भी मासूम सा सुंदर बेबी आप देख लें तो मन में प्यार की भावना उमड़ पड़ती है लेकिन यही सुंदर बच्चा यदि इस साइको किलर चाची के सामने आ जाए तो उसके सिर पर मौत का खौफनाक तांडव नजर आने लगता है. उसी पल उसके विकृत दिमाग में इस मासूम को मारने की साजिश चल रही होती है. उसने पहला शिकार बड़ी आसानी से बना लिया. ननद की छोटी बेटी को बाथरूम ले गई और मुंह को पानी में डुबाकर मार दी. किसी को शक न हो, इसके लिए अपने बेटे को भी इसी अंदाज में मार दिया और एक के बाद एक चार बच्चों को मार दिया. ऐसी विकृत और क्रुर मानसिकता वाले लोग कैसे बनते हैं, क्या इनका दिमाग अलग तरह का होता है, आखिर इतना नृशंष काम वो कैसे कर लेता है. इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए हमने मशहूर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अरुणा ब्रूटा से बात की.

क्यों बन जाती है साइको किलर

डॉ. अरुणा ब्रूटा ने इस महिला ने जो किया वह बेहद खौफनाक है. मनोविज्ञान के हिसाब से ऐसे व्यक्ति किसी चीज को लेकर ओब्सेस्ड या सनकपन होते हैं. अब यह किस तरह का ओब्सेशन है. इसमें दो स्थितियां हो सकती हैं. पहला तो यह है कि वह अपने मन में यह बिठा लिया होगा कि वह बहुत खूबसूरत है, उनसे ज्यादा कोई दूसरा खूबसूरत नहीं है. अगर है तो उससे बहुत ज्यादा जलन है. दूसरा यह भी हो सकता है कि उसके मन में यह बात धर कर गई है कि वह बहुत ज्यादा बदसूरत हैं, इसलिए किसी सुंदर व्यक्ति को देखकर मन में कुंठा और जलन आम बात है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह स्थिति अचानक नहीं आती है. बचपन से ही अपने लिए सम्मान का भाव न देखने पर इस तरह की मनोवैज्ञानिक विकृति समय पाकर पनप जाती है और दिमाग में चस्पां हो जाती हैं. इस महिला ने जिस तरह से चार बच्चों की हत्या कर दी, उसकी पूरी रिपोर्ट के बाद पता लगेगा कि असर बात क्या है, लेकिन इस तरह की विकृति में दवा और काउंसलिंग दोनों की जरूरत होती है. क्योंकि यह मानसिक बीमारी है. अफसोस की बात यह है कि हमारे समाज में मानसिक बीमारियों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है. इस मामले में शुरुआत से ही काउंसलिंग की जरूरत होती है.

इस विकृति की जड़ें कहां है

डॉ. अरुणा ब्रूटा ने बताया कि जब इस तरह की विकृति को देखेंगे तो पाएंगे कि इसकी जड़े पहले से ही डेवलप हो चुकी होती है. उन्होंने बताया कि हमारे समाज में लड़कियों को लेकर आज भी दोहरा मापदंड अपनाया जाता है. घर में लड़कियों को हमेशा डांट मिलती है. उसे अक्सर कहा जाता है कि ब्याह के बाद तुम्हारा यह घर नहीं है, अब तो अर्थी भी वही से उठेगी. हमेशा लड़कियों को कमतरी का अहसास दिलाया जाता है. बिडंबना यह है कि जिस घर में वह जन्म लेती है, जहां छोटी-छोटी आंखों में काजल लगाकर वह बड़ी होती है, वहीं से तिरस्कार मिलता है. इससे आत्मसम्मान बहुत खराब हो जाता है. अपने बारे में पुअर सेल्फ कॉन्सेप्ट बन जाता है. उसमें वीक इगो स्ट्रैंथ बन जाती है. यानी अपने प्रति दुर्भावनाओं से पैदा तनाव को सहने की क्षमता उसमें खत्म होने लगती है. इसलिए वह खुद के प्रति निगेटिव सेल्फ कॉन्सेप्ट बना लेती है. इन सबका परिणाम यह होता है कि वह अपने लक्षित दुश्मन के प्रति नफरत पैदा करने लगती है. यही स्थिति पति के साथ भी हो सकता है. पति से तरह-तरह की प्रताड़ना के बाद वह पति से नफरत करने लगती है जिसके बाद उसमें डेल्यूजनल लक्षण दिखने लगते हैं. मतलब इसमें वह घृणा तो अपने पति से करती हैं लेकिन इसका गुस्सा वह अपने बच्चों पर उतारती है. जब भी वह बच्चों को मारती है तो उसके मन में यह भाव पैदा होता है कि वह अपने पति को मार रही है. इस पर उसका अपना जोर नहीं रहता. यह बेहद खतरनाक मानसिक बीमारी वाली स्थिति है, जिसमें तत्काल इलाज की आवश्यकता है.

ऐसे लोगों को पहले से पहचानने का क्या है तरीका

साइकोलॉजिस्ट नेहल बंसल ने बताया कि ऐसे लोगों का मानसिक संतुलन खराब होता है. ऐसे में यदि थोड़ा सा ध्यान दिया जाए तो इसे आसानी से पहचाना जा सकता है. सबसे पहले तो यह कि ऐसे लोग विचित्र हरकतें करते हैं. अजीब सा व्यवहार होता है. जैसे कि कोई व्यक्ति आपके बच्चे को हद से ज्यादा प्यार करने लगे, उसके लिए खिलौना लाएं, मिठाइयां खिलाएं, चॉकलेट लाएं, उसके साथ ज्यादा समय बिताएं, छोटी सी बात होने पर तुरंत गले से चिपका लें, मतलब जरूरत से ज्यादा प्यार करें तो समझना चाहिए कि यह मानसिक संतुलन खो चुकी है. इसके पीछे का कोई एजेंडा हो सकता है. हो सकता है कि वह बच्चे से नफरत करता हो. ऐसे लोगों के पास अपने बच्चे को नहीं रहने देना चाहिए. अगर सेल्फ इमेज इश्यू की समस्या है तो ऐसे लोग खुद को खूबसूरत या बदसूरत मानने लगते हैं. ऐसे लोग बार-बार पूछेगा कि मैं सुंदर हूं या नहीं. मैं अब कैसा लग रहा हूं. ऐसे लोग खुद को लेकर पॉजिटिव नहीं होते. कुछ मामलों में अगर किसी लड़की को उसका लवर इसलिए छोड़ दिया हो कि उसे दूसरी सुंदर लड़की मिल गई तो उसे सुंदरता से जलन होने लगती है. ऐसे लोगों के व्यवहार में भी अजीब सी परिवर्तन दिखने लगेगा. इसलिए ऐसे लोगों को पहचानना आसान है.

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Lakshmi Narayan

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बेटे सहित 4 मासूमों की हत्या करने वाली साइको चाची की दरिंदगी के पीछे क्या कारण


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