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कुछ दिनों से तमिनाडु के मदुरै जिले में एक प्राचीन मंदिर और दरगाह के पास भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. यह विवाद कार्तिगई दीपम के अवसर पर हुआ. इस मंदिर को मुरुगन के छह निवासों में से दूसरा माना जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर की खास बातें…
तमिलनाडु में स्थिति सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर काफी प्रसिद्ध मंदिर है और काफी समय से यह विवाद में फंसा हुआ है. यह हिंदू मंदिर भगवान मुरुगन को समर्पित है और यह मुरुगन के छह निवासों (अरुपदाई वीडू) में से दूसरा माना जाता है. दरअसल मंदिर के पास एक दरगाह भी है, जहां भारी विरोध प्रदर्शन के बाद तनाव का माहौल बना हुआ है. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब कोर्ट के आदेश के बाद भी बुधवार शाम को कार्तिगई दीपम के अवसर पर दरगाह के पास प्राचीन स्तंभ पर दीप नहीं जलाया गया. दीपक उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, जो अधंकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. दरअसल, तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान सुब्रमण्यम स्वामी का मंदिर के साथ में सिकंदर बादशाह दरगाह भी स्थित है. आइए जानते हैं क्या है यह विवाद और मंदिर की खासियत…
अचानक इंतजाम हो गए रद्द
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश को चुनौती दी है. सरकार ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि जस्टिस स्वामीनाथन ने थिरुपरनकुंद्रम हिल पर सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में कार्तिगई दीपम जलाने का आदेश अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दिया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक याचिका दायर की गई जिसमें पहाड़ी के लैंप पोस्ट पर पारंपरिक कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति मांगी गई थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए, जज ने निर्देश दिया कि महा दीपम पहाड़ी की चोटी पर जलाया जाए और मंदिर प्रशासन से इंतजाम करने को भी कहा. हालांकि बुधवार सुबह शुरुआती तैयारियां की गई थीं, लेकिन मंदिर अधिकारियों ने अचानक इंतजाम रद्द कर दिए.
कुछ समूहों ने रास्ते पर कपूर जलाया
इंतजाम वापस लेने पर हिंदू मक्कल काची, अखिल भारत हनुमान सेना, साउथ इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और दूसरे संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. याचिकाकर्ता के आग्रह अनुसार लैंप पोस्ट पर दीया जलाने की मांग करते हुए मार्च किया. हालांकि, मंदिर की परंपरा के मुताबिक, शाम 6 बजे पहाड़ी की चोटी पर उच्चिपिल्लैयार मंदिर के पास दीपम जलाया गया, लैंप पोस्ट पर नहीं. इससे संतुष्ट ना होने पर, याचिकाकर्ता और दूसरों ने अनुरोध किया कि सीआईएसएफ की मौजूदगी में कार्य संपन्न कराया जाए. बिगड़ते हालात को देखते हुए, जिला कलेक्टर प्रवीण कुमार ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी. कई प्रदर्शनकारियों को पाबंदियों का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया. बाद में कुछ समूहों ने रास्ते पर कपूर जलाया और जाने से पहले पूजा-पाठ किया.
भगवान मुरुगन को समर्पित यह मंदिर
भगवान मुरुगन को समर्पित यह मंदिर चट्टानों को काटकर बनाया गया है और एक पहाड़ी पर बना है. यह मंदिर पांड्यों ने 6वीं शताब्दी में बनाया था. यह मंदिर तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधिकार क्षेत्र में है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुरुगन ने तिरुचेंदूर में असुर सुरपदमन को मारा था और बाद में थिरुपरनकुंद्रम में इंद्र की बेटी देवनाई से शादी की थी. मुरुगन ने यहां अपने पिता शिव की पूजा परंगिरिनाथर के रूप में की थी. मुख्य मंदिर में, मुरुगन के अलावा, शिव, विष्णु, विनायक और दुर्गा सहित कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं. मंदिर में शैव परंपरा के अनुसार पूजा की जाती है, जिसमें हर दिन छह रस्में होती हैं. तमिल महीने ऐपसी में मनाया जाने वाला कंठ षष्ठी त्योहार, यहां मनाए जाने वाले त्योहारों में सबसे खास है. इस मंदिर में 365 सीढ़ियां हैं, जो वर्ष के 365 दिनों की परिचायक हैं.
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मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें







