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Arulmigu Chakrapani Swami Temple Here ugra vishnu and Sudarshan Chakra worshipped know Significance and history of Chakrapani Swami mandir | चक्रपाणी मंदिर : यहां तीसरे नेत्र के साथ विराजमान हैं उग्र विष्णु, सुदर्शन चक्र की होती है पूजा लेकिन भोग उतना ही शांत और सरल

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Arulmigu Chakrapani Swami Temple: वैसे तो आपने भारत में भगवान विष्णु के कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे, जहां वे शांत स्वरूप में भक्तों की प्रार्थनाओं को सुनते हैं और आशीर्वाद देते हैं. लेकिन तमिनाडु में एक ऐसा मंदिर हैं, जहां भगवान विष्णु उग्र स्वरूप में विराजमान हैं और यां उनके अस्त्र सुदर्शन चक्र की पूजा होती है. आइए जानते हैं भगवान विष्णु के इस खास मंदिर के बारे में…

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चक्रपाणी मंदिर: यहां होती है सुदर्शन की पूजा, उग्र रूप में विराजमान श्रीहरि

Arulmigu Chakrapani Swami Temple: भारत देश के हर मंदिर में 33 कोटि देवी-देवताओं में से किसी न किसी को पूजा जाता है, लेकिन तमिलनाडु में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान की नहीं बल्कि उनके अस्त्र की पूजा होती है. यह मंदिर अपनी वास्तुकला और इतिहास दोनों को लेकर प्रसिद्ध है. हम बात कर रहे हैं भगवान विष्णु को समर्पित चक्रपाणी मंदिर की, जहां भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र की पूजा होती है. मान्यता है कि यह मंदिर धर्म और पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखता है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है. आइए जानते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के बारे में खास बातें.

धर्म और न्याय के प्रतीक सुदर्शन चक्र
तमिलनाडु राज्य के कुंभकोणम में, भगवान विष्णु को समर्पित चक्रपाणी मंदिर है. यह मंदिर इसलिए अनोखा है क्योंकि यहां धर्म और न्याय के प्रतीक सुदर्शन चक्र की पूजा होती है. मंदिर में भगवान विष्णु की एक प्रतिमा है, जो उग्र रूप में है. प्रतिमा की आठ भुजाएं हैं और प्रत्येक भुजा अस्त्र से सुशोभित है. यह पहली प्रतिमा है, जिसमें भगवान विष्णु का तीसरा नेत्र दिखाया गया है. यह तीसरा नेत्र भगवान शिव का प्रतीक है, जिन्होंने खुद भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र दिया था.

पाताल लोक से सुदर्शन चक्र
कावेरी नदी के तट पर स्थापित मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जब धरती पर असुर राजा जलंधरासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब भगवान विष्णु ने जलंधरासुर का वध करने के लिए पाताल लोक से सुदर्शन चक्र को बुलाया और राक्षस का अंत किया. सुदर्शन चक्र की रोशनी सूर्य से भी तेज थी और नदी किनारे स्नान कर रहे भगवान ब्रह्मा ने चक्र की शक्ति को देखा और कावेरी नदी के तट पर मंदिर की स्थापना की.

प्रसाद के रूप में आटे का हलवा
कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र की रोशनी देख सूर्य देव भी अचंभित हो गए थे और उन्होंने चक्र के तेज को कम करने की कोशिश की थी, लेकिन जब चक्र से स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए, तो सूर्य भगवान को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगी. भक्तों का मानना है कि मंदिर में दर्शन करने से नौ ग्रह संतुलित हो जाते हैं और भय से मुक्ति मिलती है. मंदिर में भक्त भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान सुदर्शन यज्ञ कराते हैं और भगवान को तुलसी, माला और प्रसाद के रूप में आटे का हलवा चढ़ाते हैं.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

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चक्रपाणी मंदिर: यहां होती है सुदर्शन की पूजा, उग्र रूप में विराजमान श्रीहरि


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