Last Updated:
Ghaziabad News: आज का समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है. AI हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा बनता जा रहा है, जिसे अलग करना मुश्किल है. बच्चे भी अपने कई कामों के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. मगर, अब वे सिर्फ उनसे अपने होमवर्क में मदद नहीं ले रहे हैं, बल्कि उससे दोस्त की तरह बातें भी कर रहे हैं. इसी को लेकर आज हम आपको एक जरूरी बात बताने जा रहे हैं.
गाजियाबाद: आज के दौर में बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ गेम या वीडियो देखने के लिए ही नहीं कर रहे बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बातचीत भी कर रहे हैं. यह ट्रेंड जितना आधुनिक दिखाई देता है, उतना ही बच्चों की मानसिक सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. कई माता-पिता को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि उनका बच्चा किन-किन एआई ऐप्स से बात कर रहा है और किस तरह की जानकारी ले रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आदत बच्चों और माता-पिता के बीच दूरी बढ़ा रही है. साथ ही बच्चों के व्यवहार में गंभीर बदलाव ला रही है.
डॉ. शिवानी के मुताबिक, आज ज्यादातर माता-पिता दोनों ही वर्किंग हैं. इसके कारण बच्चों को घर में अकेला रहना पड़ता है. अकेलापन उन्हें मोबाइल की तरफ खींचता है और धीरे-धीरे बच्चे फोन व एआई से इतना जुड़ जाते हैं कि परिवार के साथ बातचीत कम होने लगती है. डॉक्टर कहती हैं कि एआई से बात करना एकतरफा बातचीत होती है. बच्चा चाहे जितनी गलत बात बोले एआई उसे न तो टोकेगा और न ही सुधार करेगा. वहीं माता-पिता बच्चे को सही दिशा दिखाते हैं. इसलिए एआई की ओर झुकाव बच्चों के इमोशनल बॉन्ड को कम कर रहा है.
बच्चों में इन आदतों के कारण कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं. सामाजिक दूरी, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में गिरावट, माता-पिता से बात न करना और कई मामलों में वर्चुअल ऑटिज़्म जैसे लक्षण भी सामने आए हैं. 3 से 16 साल तक के बच्चों में ऐसे केस तेजी से बढ़ रहे हैं. वह कहती हैं कि बच्चों को मोबाइल का सीमित उपयोग ही करने देना चाहिए. 5 से 6 साल की उम्र में बच्चे को सिर्फ 30 मिनट मोबाइल देना चाहिए, जबकि 14–15 साल के बच्चों को एक घंटे से ज्यादा फोन नहीं देना चाहिए. यह समय भी पढ़ाई और मनोरंजन में बराबर बांटना जरूरी है. माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा कौन-सा गेम खेल रहा है और कहीं किसी गलत ऐप से जुड़ तो नहीं रहा.
वह पैरेंटल एक्सेस कोड लगाने की सलाह देती हैं ताकि माता-पिता फोन की गतिविधियों पर नजर रख सकें. डॉक्टर शिवानी कहती हैं कि आज बच्चे 24 घंटे में से 8 घंटे से ज्यादा समय फोन पर बिताने लगे हैं, जिसके कारण वे आउटडोर गेम से दूर हो रहे हैं और समाज से कटते जा रहे हैं. यदि बच्चा बात करना बंद कर दे, पढ़ाई में कमजोर होने लगे या अत्यधिक चिड़चिड़ापन दिखाने लगे तो तुरंत किसी मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से काउंसलिंग करवाना जरूरी है. समय रहते हस्तक्षेप करने से बच्चे के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-children-who-interact-with-artificial-intelligence-are-at-increased-risk-of-virtual-autism-be-alert-local18-9930979.html







