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Chhatarpur News: जटाशंकर धाम भगवान शंकर की अनूठी कृपा और कई अलौकिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है. इस धाम के अंदर तीन कुंड हैं, जिसमें से गर्म, ठंडा और साधारण पानी आता है.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर के बिजावर तहसील अंर्तगत जटाशंकर धाम घने जंगलों के बीच एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसे डकैतों ने बनवाया था. डकैतों ने लूट और अपहरण के पैसों से मंदिर में ही धर्मशाला का निर्माण भी करवाया था. साथ ही वे हवन, यज्ञ और भंडारे पर भी पैसे खर्च करते थे. इन डकैतों का खौफ ऐसा था कि शाम होते ही इलाके में सन्नाटा पसर जाता था. मंदिर के पास पिछले 60 सालों से दुकान लगा रहे जयशंकर अग्रवाल Bharat.one को बताते हैं कि बिजावर से 11 किलोमीटर दूर आस्था के केंद्र जटाशंकर धाम में कभी घना जंगल, ऊंची पहाडियां थीं. लोग यहां जाने से डरते थे. इसके साथ ही यहां खूंखार तीन डकैतों की गैंग फरारी काटते थे. डकैत जो धन लूटते थे, उसका अधिकांश हिस्सा मंदिर निर्माण में लगा दिया करते थे. आज भी इस स्थान पर डकैतों द्वारा बनवाई गई धर्मशाला और सीढ़ियां बनी हुई हैं, जो इस बात की गवाही देती हैं.
जयशंकर बताते हैं कि कई सेठ-साहूकारों ने भी डकैतों के डर से यहां विकास कार्य करवाए थे लेकिन इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को कभी डकैतों ने नहीं लूटा, चाहे वे अपने साथ कितना भी धन लेकर आते रहे हो.
इतिहास के जानकार शंकर लाल Bharat.one को बताते हैं कि करीब 1946 में मूरत सिंह, रामसिंह और पूजा बाबा नाम से डकैतों का बुंदेलखंड के छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर जिले के इलाके में दबदबा था. लोग उनके डर से थर-थर कांपते थे. त्रिमूर्ति डकैत किसी का भी अपहरण कर लेते थे और अच्छी खासी फिरौती भी वसूलते थे. बताते हैं कि डकैत मुखबिरी करने वालों के नाक और कान काट लिया करते थे.
वहीं श्री जटाशंकर धाम के पुजारी राजकिशोर बड़गइयां Bharat.one से बातचीत में बताते हैं कि इसे बुंदेलखंड का केदारनाथ कहा जाता है. यहां हर साल मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर्व पर लाखों श्रद्धालु आते हैं. यहां जो भी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा पूर्ण होती है.
अलौकिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध धाम
जटाशंकर धाम की बात की जाए, तो यह धाम भगवान शिव की अनूठी कृपा और कई अलौकिक शक्तियों के लिए जाना जाता है. इस धाम के अंदर तीन कुंड मौजूद हैं, जिसमें से ठंडा, गर्म और साधारण पानी आता है. ऐसा माना जाता है कि इन कुंड में स्नान करने से बड़े से बड़ा चर्म रोग दूर हो जाता है. यही वजह है कि लोग यहां से जल लेकर अपने-अपने घर ले जाते हैं. मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग मौजूद है, जो स्वयंभू है. आज भी यह ज्यों का त्यों बना हुआ है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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