भारत में स्वास्तिक को अत्यंत शुभ और मंगलकारी चिन्ह माना जाता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 99 प्रतिशत लोग इसे बनाने का सही तरीका नहीं जानते. घर के दरवाजे, पूजा स्थल, मंदिर, दुकान या किसी शुभ कार्य से पहले लोग स्वास्तिक बना तो देते हैं, लेकिन दिशा, बनावट और सामग्री की गलतियों के कारण इसका शुभ फल मिलने की जगह उल्टा प्रभाव पड़ सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गलत तरीके से बना स्वास्तिक नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है, जिसे लोग अपशकुन से जोड़कर देखते हैं.
स्वास्तिक शब्द संस्कृत के “सु” और “अस्ति” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है “कल्याण हो” या “मंगल हो”. असली स्वास्तिक के चारों भुजाएं समान होती हैं और ये दाईं ओर घूमती हुई बनती हैं. बहुत से लोग अनजाने में उल्टा या टेढ़ा स्वास्तिक बना देते हैं, जिसे शास्त्रों में शुभ नहीं माना गया है. बाईं ओर घूमने वाला चिन्ह तांत्रिक या विशेष साधना में उपयोग होता है, लेकिन सामान्य गृहस्थ जीवन और पूजा में इसका प्रयोग वर्जित माना जाता है.
स्वास्तिक बनाने में सामग्री का भी खास महत्व होता है. पूजा या शुभ अवसरों पर स्वास्तिक हमेशा हल्दी, कुमकुम, चंदन, रोली, सिंदूर या गाय के गोबर से बनाना शुभ माना जाता है. पेंसिल, पेन, काले रंग या टूटे हुए चॉक से बनाया गया स्वास्तिक धार्मिक दृष्टि से सही नहीं माना जाता. कई लोग जल्दबाजी में दीवार या फर्श पर कहीं भी स्वास्तिक बना देते हैं, जबकि इसे साफ और पवित्र स्थान पर ही बनाना चाहिए.
स्वास्तिक बनाने का सही समय और स्थान भी बहुत जरूरी होता है. इसे हमेशा स्नान करके, शांत मन से और सकारात्मक सोच के साथ बनाना चाहिए. सुबह का समय, खासकर सूर्योदय के बाद, स्वास्तिक बनाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है. दरवाजे पर स्वास्तिक बनाते समय ध्यान रखें कि वह आंखों की सीध में हो और टूटा या अधूरा न हो. टूटा हुआ या घिसा हुआ स्वास्तिक दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है.
एक और बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है स्वास्तिक को सजावट की तरह इस्तेमाल करना. स्वास्तिक कोई डिजाइन या फैशन सिंबल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक चिन्ह है. इसे मजाक, दिखावे या गलत जगह पर बनाने से उसकी पवित्रता खत्म हो जाती है. पूजा के बाद स्वास्तिक को पैरों से रौंदना या उस पर गंदगी होने देना भी अशुभ माना जाता है.
सही तरीके से बनाया गया स्वास्तिक घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि लाता है. यह नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और वातावरण को पवित्र बनाए रखता है. इसलिए जरूरी है कि स्वास्तिक बनाते समय उसकी दिशा, आकार, सामग्री और भावना का पूरा ध्यान रखा जाए. छोटी-सी लापरवाही भी इसके शुभ प्रभाव को नकारात्मक बना सकती है, इसलिए अगली बार स्वास्तिक बनाते समय सही विधि अपनाएं और अपशकुन से बचें.







