Makar Sankranti 2026 Date: मकर संक्रांति का पर्व हजारों वर्षों से सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक रहा है. नए साल की शुरुआत में इस पर्व को बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. मकर संक्रांति से ही नए साल के त्योहार का आगाज हो जाता है, यह पर्व सर्दियों के मौसम का अंत और गर्मी की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. मकर संक्रांति वह पावन दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. सूर्य जब किसी राशि में प्रवेश करते हैं, उस तिथि को संक्रांति के नाम से जाना जाता है, लेकिन सभी संक्रांति में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. लेकिन साल 2026 में मकर संक्रांति की तिथि को लेकर काफी कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व कब मनाया जाएगा…
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है. शास्त्रों में उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति और पुण्यकाल माना गया है. महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर देह त्याग किया था, इसलिए यह काल मोक्षदायक माना गया. मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और जप का विशेष फल मिलता है. इस दिन गंगा, यमुना अथवा किसी भी पवित्र जल में स्नान करने से पापक्षय होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

मकर संक्रांति पर दान का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि ‘माघे मासि दिने पुण्ये, मकरस्थे दिवाकरे’ अर्थात मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अक्षय फल देता है. मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र, अन्न का दान श्रेष्ठ माना गया है. तिल का संबंध शनि से है, अतः यह शनि दोष शांति में सहायक होता है. मकर संक्रांति का पर्व कृषि और ऋतु परिवर्तन से भी जुड़ा हुआ है. देशभर में इस दिन को विभिन्न नामों से मनाया जाता है, उत्तर भारत में मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू और पंजाब में लोहड़ी (पूर्व संध्या). मकर संक्रांति हमें यह संदेश देती है कि जैसे सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ना चाहिए. यह दिन नव आरंभ, सकारात्मक संकल्प और साधना के लिए श्रेष्ठ है.
मकर संक्रांति 2026 कब है?
मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी दिन बुधवार को है लेकिन सूर्य दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर मकर राशि में गोचर करेंगे. ऐसे में पुण्यकाल का समय दिन में 8 बजकर 42 मिनट पर होने वाला है. महापुण्य काल मुहूर्त सुबह 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगा 9 बजकर 4 मिनट तक तक रहेगा. वहीं मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का मुहूर्त सुबह 9 बजकर 3 मिनट से सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक.
मकर संक्रांति पर विशेष संयोग
मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी का संयोग भी बन रहा है. दरअसल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा. इस तरह आपको सूर्य देव के साथ भगवान विष्णु की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने का मौका मिलेगा. ऐसे में एकादशी के दिन संक्रांति है तो आप इस दिन चावल का सेवन ना करें लेकिन आप दान कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं.

मकर संक्रांति से शुरू हो जाएंगे शुभ कार्य
ग्रहों के राजा सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास आरंभ हो जाता है और इसी के साथ शुभ व मांगलिक कार्यक्रम वर्जित हो जाते हैं. वहीं सूर्य जब मकर राशि में गोचर करते हैं, तब खरमास खत्म हो जाता है और शुभ व मांगलिक कार्यक्रम जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई आदि कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं.

















