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Dharohar: राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित सैंपऊ महादेव मंदिर, जिसे राम रामेश्वर मंदिर भी कहा जाता है, स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था का अद्भुत केंद्र है. इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के दीवान राजधर कन्हैया लाल द्वारा करवाया गया था. मान्यताओं के अनुसार यह शिवलिंग त्रेता युग का है, जिसे भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र के साथ यज्ञ के दौरान स्थापित किया था.
धौलपुर. जिला उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं से घिरा हुआ है. वैसे तो धौलपुर जिले में कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनका निर्माण धौलपुर रियासत के राजा और महाराजाओं ने करवाया था. उन्हीं में से एक मंदिर है सैंपऊ महादेव मंदिर, जिसे राम रामेश्वर मंदिर भी कहा जाता है. इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के महाराज भगवंत सिंह के मामा राजधर कन्हैया लाल ने करवाया था.
राजधर कन्हैयालाल धौलपुर रियासत के दीवान हुआ करते थे. धौलपुर जिले से 30 किलोमीटर दूर सैंपऊ उपखंड में स्थित यह मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है. मंदिर की दीवारों पर अनेक प्रकार के पशु-पक्षियों का चित्रण किया गया है और भगवान की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं. मंदिर के गर्भगृह में पहुंचने के लिए चार दरवाजे हैं.
यह शिवलिंग भगवान श्री राम के युग, त्रेता युग का है
सैंपऊ महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह शिवलिंग भगवान श्री राम के युग, त्रेता युग का है. भगवान राम ने अपने गुरु विश्वामित्र के साथ यहां पर यज्ञ किया था और महादेव के शिवलिंग का जल अभिषेक कर प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया था. तभी से इस मंदिर को राम रामेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाने लगा. महादेव मंदिर के महंत बताते हैं कि यहीं पर गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्री राम ने ताड़का का वध किया था. सैंपऊ महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सन 1305 में संत श्याम रतन पुरी अपनी बहन लीला बाई के साथ यहां आए थे. उन्हें भगवान महादेव ने सपने में आकर शिवलिंग का दर्शन कराया था, तब से इस मंदिर को स्वयं शंभू महादेव भी कहा जाने लगा.
सैंपऊ महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जब धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह को कोई पुत्र नहीं हो रहा था, तब महादेव के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई, इसलिए धौलपुर के महाराजा कीरत सिंह इस शिवलिंग को धौलपुर स्थित चोपड़ा मंदिर ले जाना चाहते थे. महाराजा कीरत सिंह ने इस शिवलिंग को खुदवाने का प्रयास किया, कई दिनों तक शिवलिंग की खुदाई चलती रही, पर शिवलिंग का अंतिम छोर दिखाई नहीं दिया. बाद में इस मंदिर का निर्माण महाराज कीरत सिंह के पुत्र भगवंत सिंह के शासनकाल में हुआ.
सोमवार को बड़ी संख्या में आते है महादेव के भक्त
सैंपऊ महादेव मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां स्थित विशालकाय कुएं का निर्माण धौलपुर रियासत के राजा भगवंत सिंह जी ने करवाया था. यहां पर एक ऐसा वृक्ष भी है जिसकी एक डाली पर फूल लगते हैं और एक डाली पर कांटे लगते हैं. इन दोनों डालियों को नर और मादा के रूप में जाना जाता है. सैंपऊ महादेव मंदिर में दर्शन करने आए भक्त बताते हैं कि सैंपऊ महादेव शिवलिंग एशिया के सबसे बड़े शिवलिंगों में गिना जाता है और इसके दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. महाशिवरात्रि, श्रावण मास एवं साप्ताहिक सोमवार को बड़ी संख्या में महादेव के भक्त पूजा-अर्चना करने के लिए यहां आते हैं.
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