Travel Without Money: आज के समय में हर दूसरा इंसान ट्रैवल करना चाहता है. नए शहर देखना, नई जगहों का खाना चखना, अलग-अलग लोगों से मिलना और रोज़मर्रा की बंधी-बंधाई ज़िंदगी से थोड़ा बाहर निकलना अब सपना नहीं रहा. सोशल मीडिया खोलते ही कोई पहाड़ों में बैठा लैपटॉप पर काम करता दिखता है, तो कोई समंदर किनारे कॉफी पीते हुए वीडियो शूट कर रहा होता है. यहीं से दिमाग में सवाल आता है-क्या सच में बिना पैसे के ट्रैवल किया जा सकता है? इस सवाल का जवाब एक लाइन में देना आसान नहीं है. ट्रैवल कभी भी पूरी तरह फ्री नहीं होता, लेकिन हां, ऐसा तरीका ज़रूर है जिसमें आप घूमते हुए अपने खर्च खुद निकाल सकते हैं. आज कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने नौकरी छोड़ी, एक जगह टिके रहने की सोच बदली और ट्रैवल को ही अपनी कमाई का ज़रिया बना लिया. इनके लिए ट्रैवल सिर्फ शौक नहीं, बल्कि काम है. अगर ये लोग घूमना बंद कर दें, तो इनकी कमाई भी रुक जाए. असल फर्क सोच का है. आप ट्रैवल को छुट्टी की तरह देखते हैं या लाइफस्टाइल की तरह. यही तय करता है कि आपका खर्च बढ़ेगा या आप उसे संभाल पाएंगे. इस आर्टिकल में हम बात करेंगे उसी रियल रास्ते की, जहां ट्रैवल सिर्फ खर्च नहीं बल्कि कमाई का मौका बन सकता है. बिना हवा-हवाई बातों के, बिल्कुल प्रैक्टिकल तरीके से.
टूरिस्ट बनना है या ट्रैवलर?
-सबसे पहले आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा-आप टूरिस्ट बनना चाहते हैं या ट्रैवलर?
-टूरिस्ट वो होता है जिसे सब कुछ आराम से चाहिए. अच्छी होटल, तय टाइम की गाड़ी, फेमस जगहों की लिस्ट और बिना किसी झंझट के घूमना. इसमें मज़ा तो बहुत है, लेकिन खर्च भी उतना ही ज़्यादा होता है.
-ट्रैवलर की सोच अलग होती है. उसे बस अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचना होता है, फिर चाहे बस से जाए, लिफ्ट लेकर जाए या पैदल चले. ट्रैवलर को चुनौतियों से डर नहीं लगता, बल्कि वही उसकी असली कमाई होती है-एक्सपीरियंस. रास्ते की मुश्किलें उसे नए सॉल्यूशन ढूंढना सिखाती हैं और यही चीज़ आगे चलकर काम आती है.
अगर आपका मकसद कम बजट में लंबे समय तक घूमना है, तो टूरिस्ट वाली सोच छोड़नी पड़ेगी.
रिमोट जॉब: ट्रैवल के साथ सबसे सुरक्षित रास्ता
-अगर आप ट्रैवल करते हुए अपने खर्च आराम से निकालना चाहते हैं, तो रिमोट जॉब सबसे आसान रास्ता है. आज बहुत सी कंपनियां ऐसी हैं जो लोकेशन नहीं, काम देखती हैं. लैपटॉप और इंटरनेट हो तो आप कहीं से भी काम कर सकते हैं.
-कंटेंट राइटिंग, ग्राफिक डिजाइन, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस जैसी कई जॉब्स हैं जो ट्रैवल के साथ की जा सकती हैं. कई ट्रैवलर ऐसे मिल जाएंगे जो सुबह पहाड़ों में काम करते हैं और शाम को आसपास घूमते हैं.
स्किल सीखिए और फ्रीलांसिंग शुरू कीजिए
-अगर आपके पास पहले से रिमोट जॉब नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं. आप किसी एक स्किल पर काम शुरू कर सकते हैं. शुरुआत में थोड़ा टाइम लगेगा, लेकिन जैसे ही पहली कमाई आती है, रास्ता साफ होने लगता है.
-एक रियल उदाहरण लें-कई लोग अपनी पढ़ाई से जुड़ी फील्ड में फ्रीलांसिंग शुरू करते हैं. जैसे किसी ने रिमोट सेंसिंग, आईटी, डिजाइन या मार्केटिंग सीखी है, तो उसी से जुड़े प्रोजेक्ट्स उठाने लगते हैं. जैसे-जैसे कमाई बढ़ती है, वैसे-वैसे ट्रैवल भी शुरू हो जाता है.

कंटेंट क्रिएशन: दिखता आसान, है थोड़ा रिस्की
-आजकल बहुत लोग सोचते हैं कि वीडियो बनाओ, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर डालो और पैसे आने लगेंगे. सच ये है कि कंटेंट क्रिएशन में मज़ा बहुत है, लेकिन पेशेंस उससे भी ज़्यादा चाहिए.
-चैनल कब मोनेटाइज होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं. किसी को एक साल लगता है, किसी को तीन साल. और मोनेटाइज होने के बाद भी ये तय नहीं कि आपकी कमाई आपके ट्रैवल खर्च निकाल पाएगी.
इसलिए कई अनुभवी ट्रैवलर कंटेंट क्रिएशन के साथ-साथ फ्रीलांसिंग भी करते हैं, ताकि एक सहारा बना रहे.
खुद का चैनल ही नहीं, और भी रास्ते हैं
कंटेंट क्रिएशन का मतलब ये नहीं कि आपको अपना चैनल ही बनाना पड़े. आप ट्रैवल कंपनियों, ब्लॉग्स या यूट्यूब चैनल्स के लिए कंटेंट बना सकते हैं. ब्लॉग लिखना, वीडियो एडिट करना, स्क्रिप्ट तैयार करना-ये सब काम भी पैसे दिला सकते हैं. इंस्टाग्राम पर लाखों व्यूज आने के बाद भी कमाई बहुत कम हो सकती है, जबकि यूट्यूब में ब्रांड कोलैब और ऑडियंस फंडिंग जैसे ऑप्शन मिलते हैं.
वॉलंटियरिंग और होमस्टे का सहारा
अगर आप खर्च और कम करना चाहते हैं, तो वॉलंटियरिंग एक अच्छा रास्ता है. कई होमस्टे और कंपनियां ऐसी होती हैं जहां आपको उनके काम में मदद करनी होती है और बदले में फ्री खाना और रहने की जगह मिलती है. कहीं किचन का काम, कहीं गेस्ट हैंडल करना, कहीं गाइड की मदद-काम अलग-अलग हो सकता है. इससे आपका स्टे का खर्च लगभग खत्म हो जाता है.

हर किसी के लिए एक ही रास्ता नहीं होता
एफिलिएट मार्केटिंग, ट्रेडिंग, हिचहाइकिंग जैसे और भी ऑप्शन हैं, लेकिन हर चीज़ हर इंसान के लिए सही नहीं होती. हिचहाइकिंग में रिस्क बहुत होता है और लंबे समय तक उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
आखिर में बात वहीं आकर रुकती है-आपके पास कौन सी स्किल है और आप उसे ट्रैवल के साथ कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं. घूमना भी मेहनत मांगता है और कई बार बहुत थकाने वाला होता है, इसलिए फैसले सोच-समझकर लेने जरूरी हैं.
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