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झारखंड के इस मंदिर में धागा बांधने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिए इस मंदिर का इतिहास!

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Dewri Mandir History In Hindi : झारखंड के जंगलों से कई दिलचस्प कहानियां सामने आती हैं. ये कहानियां अक्सर लोगों को हैरान कर देती हैं. यहां धार्मिक महत्व के कई स्थान भी हैं, जिनमें से हर एक का अपना अनोखा इतिहास है. ऐसा ही एक स्थान है देवड़ी मंदिर…

झारखंड के इस मंदिर में धागा बांधने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिएDewri Mandir History

Dewri Mandir History In Hindi : झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 60 किलोमीटर दूर तमाड़ में स्थित देवरी मंदिर (Dewri Mandir) एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहां आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए, बल्कि अपनी अनूठी पूजा पद्धति और महेंद्र सिंह धोनी की अटूट श्रद्धा के कारण देशभर में प्रसिद्ध है. आइए जानते हैं देवरी मंदिर के इतिहास के बारें में विस्तार से…

16 भुजाओं वाली मां दुर्गा का रहस्य-
आमतौर पर देवी दुर्गा की मूर्तियां 8 या 10 भुजाओं वाली होती हैं, लेकिन देवरी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित मां दुर्गा की 16 भुजाओं वाली प्रतिमा है. साढ़े तीन फीट ऊंची यह प्रतिमा काले पत्थर से बनी है और ओडिशा की मूर्तिकला शैली पर आधारित मानी जाती है। स्थानीय लोग इन्हें ‘सोलहभुजी देवी’ भी कहते हैं.

इतिहास और पौराणिक कथाएं-
मंदिर के इतिहास को लेकर कई मान्यताएं हैं. कहा जाता है कि लगभग 700 साल पहले सिंहभूम के मुंडा राजा ‘केरा’ जब युद्ध में पराजित होकर लौट रहे थे, तब उन्होंने यहां मां का आह्वान किया. मां के आशीर्वाद से उन्होंने अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया और कृतज्ञता स्वरूप इस मंदिर का निर्माण करवाया. कुछ जानकार इसका संबंध 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का बताते हैं और माना जाता है कि इसका जीर्णोद्धार बाद में कराया गया. मंदिर की बनावट में बड़े-बड़े पत्थरों को बिना किसी सीमेंट या गारे के एक-दूसरे के ऊपर जोड़कर (Interlocking) बनाया गया है.

आदिवासी और हिंदू परंपरा-
देवरी मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां आदिवासी पाहन (पुजारी) और ब्राह्मण पुजारी दोनों मिलकर सेवा करते हैं. सप्ताह के छह दिन (बुधवार से सोमवार) आदिवासी पाहन मां की पूजा करते हैं. केवल मंगलवार को ब्राह्मण पुजारी द्वारा विशेष अनुष्ठान और पूजा संपन्न की जाती है. यह व्यवस्था सदियों से चली आ रही है और हिंदू-आदिवासी एकता का प्रतीक मानी जाती है.

धोनी और देवरी मंदिर का अटूट रिश्ता-
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इस मंदिर के परम भक्त हैं. वे अपने करियर के शुरुआती दिनों से ही यहां मत्था टेकने आते रहे हैं. चाहे वर्ल्ड कप जीतना हो या आईपीएल, धोनी अक्सर यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. हाल ही में 2025-26 के दौरान भी वे अपने परिवार के साथ यहां पूजा-अर्चना करते देखे गए, जिससे यह मंदिर पर्यटकों के बीच और भी लोकप्रिय हो गया है.

मान्यता-
भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर परिसर में लाल और पीले धागे बांधते हैं और मन्नत पूरी होने पर उन्हें खोलने दोबारा आते हैं.

Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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Rajvant Prajapati

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झारखंड के इस मंदिर में धागा बांधने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, जानिए

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