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Holashtak 2026: वाराणसी में होलाष्टक 23 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नया व्यापार और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. होलाष्टक का संबंध प्रहलाद–होलिका की पौराणिक कथा से है.
वाराणसी: सनातन धर्म में रंगों के त्योहार होली का विशेष महत्व होता है. इस महापर्व के आठ दिन पहले होलाष्टक लगता है. वैदिक पंचांग के मुताबिक फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत होती है. शास्त्रों में होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ नहीं माना जाता है. इन आठ दिनों में मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है. आइये जानते हैं काशी के ज्योतिषाचार्य से होलाष्टक के दौरान किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.
पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि इस बार होलाष्टक यानी फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 फरवरी से होगी. वहीं पूर्णिमा के दिन यानी 3 मार्च को इसका समापन होगा. वैसे तो होलिका दहन के साथ होलाष्टक भी समाप्त हो जाता है, लेकिन तिथियों में हेर फेर के कारण इस बार होलिका दहन 2 मार्च को होगा और होलाष्टक 3 मार्च को समाप्त हो रहा है. वहीं 4 मार्च को देशभर में होली का महाउत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा.
नए काम का न करें श्री गणेश
होलाष्टक के दिनों में नए व्यापार की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा इस समय में यदि आप घर की नींव या नए भवन के रजिस्ट्री की सोच रहें हैं तो अपने इस फैसले को आपको इस समय के बीच टाल देना चाहिए.
मांगलिक कार्यों पर भी रोक
इसके अलावा होलाष्टक के आठ दिनों में सभी तरह की मांगलिक कार्यों पर रोक होती है.इन आठ दिनों में शादी,मुंडन,पूजा अनुष्ठान, इंगेजमेंट,गृह प्रवेश जैसे शुभ कामों से बचना चाहिए.वरना इसका बुरा प्रभाव जीवन पर पड़ता है.
ये है धार्मिक कथा
धार्मिक कथाओं के मुताबिक, होलाष्टक के इन आठ दिनों में हिरणकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परमभक्त प्रहलाद को कई यातनाएं दी थी.अंतिम दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा जिसमें होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद बच गए. इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता है.इसलिए इन दिनों में हर तरह के शुभ कार्यों की मनाही होती है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
















