Social Media Addiction Side Effects: फोन पर वीडियो रील्स या शॉर्ट्स देखने की लत युवाओं को बर्बाद कर रही है. हाल ही में आए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में हुए इस खुलासे ने दिमाग हिला दिया है. सोशल मीडिया का ये नशा न केवल युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहा है बल्कि जिस उम्र में उन्हें पढ़ना और करियर बनाना चाहिए, उस उम्र में उन्हें एंग्जाइटी, स्ट्रैस, डिप्रेशन और कम आत्मसम्मान जैसी समस्याओं को पैदा कर रहा है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की बुरी आदत का सीधा संबंध युवाओं में बढ़ने वाली मानसिक बीमारियों से है. युवा इसकी वजह से साइबरबुलिंग का भी शिकार हो रहे हैं. सर्वे में डिजिटल लत को एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक चिंता के रूप में चिह्नित किया गया है जिसका भारत की जनसंख्या पर गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.
कई भारतीय और ग्लोबल स्टडीज के आधार पर सर्वे में कहा गया है कि सोशल मीडिया की लत विशेष रूप से 15-24 वर्ष की उम्र के लोगों में सबसे ज्यादा है. इसमें बाध्यकारी स्क्रॉलिंग और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली चीजों से खुद की और खुद के जीवन की तुलना लगातार चिंता और तनाव के लक्षण पैदा करने का मुख्य कारक बन रही है.
हालांकि बुजुर्ग भी इसके नशे से बचे नहीं हैं. अगर आप अपने आसपास नजर डालें तो आपको ज्यादातर लोग फोन और सोशल मीडिया में घुसे हुए मिलेंगे. युवा इतनी गहराई से सोशल मीडिया में डूब जाते हैं कि वे अपने आसपास होने वाली गतिविधियों से भी अनजान रहते हैं.
सर्वेक्षण आगे बताता है कि डिजिटल लत पर किए गए रिसर्च से युवाओं में इसके विशिष्ट रिस्क और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का पता चलता है. सोशल मीडिया पर बार-बार स्क्रॉल करना और सामाजिक तुलना करना विशेष रूप से चिंता और अवसाद के लक्षणों से जुड़ा हुआ है. यहां तक कि गेमिंग, जुआ और लगातार टीवी देखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करते हैं.
गेम्स खेलने का असर भी जान लें
सोशल मीडिया के अलावा, सर्वे में डिजिटल यूज के अन्य रूपों से जुड़े खतरों को भी उजागर किया गया है. इसमें कहा गया है कि गेमिंग डिसऑर्डर से नींद में गड़बड़ी, आक्रामकता, सामाजिक अलगाव और अवसाद होने के प्रमाण मिले हैं, और किशोर विशेष रूप से इसके प्रति संवेदनशील हैं.
सर्वे में ऑनलाइन जुआ और असली पैसे वाले गेमिंग को लेकर भी चिंता जताई गई, जिसमें फाइनेंशन स्ट्रैस, चिंता, अवसाद और यहां तक कि आत्महत्या के विचारों सहित नुकसान के सबूतों का उल्लेख किया गया है.
इसमें कहा गया है कि स्ट्रीमिंग और शॉर्ट वीडियो की लत के प्रमाण बताते हैं कि लगातार वीडियो देखने और अंतहीन वीडियो लूप का संबंध खराब नींद, कम एकाग्रता और बढ़े हुए तनाव से है.
ऑफलाइन संबंध हैं फायदेमंद
सर्वे में कहा गया है कि मानसिक सेहत के लिए ऑफलाइन सामाजिक संबंध महत्वपूर्ण हैं और लोगों को बेहतर जीवन के लिए प्रेरित करते हैं.सामाजिक संबंध किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.सबूत बताते हैं कि बार-बार आमने-सामने की बातचीत बेहतर मेंटल हेल्थ से जुड़ी है. इससे यह संकेत मिलता है कि अत्यधिक डिजिटल व्यस्तता स्वस्थ प्रकार की सामाजिक बातचीत को कम कर सकती है.
मोटापा और लाइफस्टाइल के रिस्क
मोटापा और खराब जीवनशैली की वजह से लोगों को काफी नुकसान झेलने पड़ सकते हैं. डिजिटल व्यसन पर चेतावनियां जीवनशैली से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों पर व्यापक चिंताओं के साथ सामने आई हैं. सर्वेक्षण के बाद मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने बढ़ते मोटापे को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने में एक प्रमुख चुनौती के रूप में उजागर किया है.
उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में स्वास्थ्य जोखिमों को दर्शाने वाले स्पष्ट खाद्य लेबलिंग होनी चाहिए. ताकि बेहतर जानकारी लोगों को अधिक सचेत और सूचित आहार संबंधी विकल्प चुनने में सक्षम बना सके.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-social-media-addiction-streaming-scrolling-shorts-videos-trigger-stress-depression-anxiety-low-self-esteem-dangers-says-economic-survey-2025-26-ws-kln-10120920.html







