Phalgun Month 2026 : हिंदू पंचांग का हर महीना अपने भीतर एक अलग रंग, अलग ऊर्जा और अलग सीख समेटे होता है. लेकिन जब बात फाल्गुन माह की आती है, तो यह सिर्फ एक महीना नहीं रह जाता, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का विशेष काल बन जाता है. साल का यह अंतिम महीना कई बड़े पर्वों का साक्षी बनता है और यही कारण है कि शास्त्रों में इसे बेहद संवेदनशील और पुण्यदायी माना गया है. द्रिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह 2026 की शुरुआत 2 फरवरी से होगी और इसका समापन 3 मार्च को होगा. इस दौरान भगवान शिव और श्रीकृष्ण की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है. लेकिन जितना जरूरी पूजा-पाठ है, उतना ही जरूरी है कुछ बातों से दूरी बनाए रखना. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
फाल्गुन माह का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
फाल्गुन मास को आत्मशुद्धि का महीना कहा जाता है. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस समय प्रकृति भी बदलाव के दौर से गुजरती है और इंसान को भी अपने भीतर झांकने का अवसर मिलता है. यही कारण है कि इस महीने किए गए जप, तप, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना गया है.
शिव और कृष्ण भक्ति का विशेष संयोग
महाशिवरात्रि और होली जैसे पर्व इसी माह आते हैं. एक ओर शिव साधना का गूढ़ पक्ष सामने आता है, तो दूसरी ओर कृष्ण भक्ति का उल्लास. यह संतुलन ही फाल्गुन माह को खास बनाता है.
फाल्गुन माह में किन कामों से जरूर बचें
शास्त्रों और परंपराओं में कुछ कार्य ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें फाल्गुन माह में करना वर्जित माना गया है. ये नियम डराने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए हैं.
होलाष्टक में मांगलिक कार्य
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक कहलाता है. इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. मान्यता है कि इस समय ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती.

तामसिक भोजन और आदतें
मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाना बेहतर माना गया है. यह समय शरीर ही नहीं, मन की शुद्धि का भी है.
वाणी और व्यवहार पर संयम
किसी का अपमान करना, झूठ बोलना या किसी को नुकसान पहुंचाने की भावना रखना इस माह में विशेष रूप से अशुभ माना गया है. खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंदों के प्रति असंवेदनशीलता पुण्य में कमी ला सकती है.
रोजमर्रा की छोटी बातें जो बड़ा असर डालती हैं
अक्सर लोग सोचते हैं कि धर्म सिर्फ बड़े कर्मों से जुड़ा होता है, लेकिन फाल्गुन माह हमें छोटी आदतों पर ध्यान देना सिखाता है.

स्वच्छता और नियमित स्नान
घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई, नियमित स्नान और सात्विक दिनचर्या से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यह मन को भी हल्का करता है.
क्रोध और अहंकार से दूरी
फाल्गुन में मौसम के साथ चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है. ऐसे में संयम और धैर्य सबसे बड़ा तप बन जाता है.
फाल्गुन माह में दान का विशेष महत्व
यह महीना दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है. अन्न, वस्त्र, जल, धन या सिर्फ किसी जरूरतमंद की मदद—हर छोटा प्रयास बड़ा फल दे सकता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग फाल्गुन में सामूहिक दान और सेवा को परंपरा की तरह निभाते हैं.
सेवा भाव से मिलती है मानसिक शांति
केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी दान और सेवा इंसान को भीतर से मजबूत बनाती है. शायद यही वजह है कि फाल्गुन माह को मन और आत्मा दोनों की सफाई का समय कहा गया है.
फाल्गुन माह केवल पर्वों का महीना नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर है. अगर इस दौरान संयम, भक्ति और संवेदनशीलता के साथ जीवन जिया जाए, तो यह महीना सच में बदलाव लेकर आता है.
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