Silver Alternatives For Worship : पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतें जिस तरह से ऊपर गई हैं, उसने आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. खासकर वे लोग, जो पूजा-पाठ, व्रत, दान या किसी शुभ अवसर पर चांदी के बर्तन, सिक्के या मूर्तियां इस्तेमाल करते हैं. सवाल सीधा है जब चांदी जेब से बाहर हो जाए, तो क्या पूजा अधूरी रह जाती है? असल में, शास्त्रों की बात करें तो जवाब साफ है: नहीं. हिंदू परंपरा में धातु का महत्व जरूर है, लेकिन उससे कहीं ज्यादा महत्व भावना और श्रद्धा का है. यही वजह है कि ग्रंथों में चांदी के अलावा भी कई ऐसी धातुओं का उल्लेख मिलता है, जिन्हें पूजा के लिए शुभ और फलदायी माना गया है. तांबा, पीतल, कांसा और पंचधातु ये सिर्फ विकल्प नहीं हैं, बल्कि अपने-अपने गुणों के कारण विशेष स्थान रखते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
Silver alternatives for worship: शास्त्र क्या कहते हैं?
पूजा में इस्तेमाल होने वाली धातुएं सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रतीक का विषय भी हैं. हर धातु का अपना स्वभाव माना गया है कोई सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है, तो कोई नकारात्मक प्रभाव को कम करती है.
तांबा (Copper): ऊर्जा और शुद्धता का प्रतीक
पूजा में तांबे का महत्व
तांबा भारतीय घरों में सबसे आम और भरोसेमंद धातु मानी जाती है. सुबह सूर्य को अर्घ्य देना हो या कलश की स्थापना तांबा हर जगह दिख जाता है.
-जल को शुद्ध रखने में मदद करता है
-घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है
-वास्तु दोष कम करने में सहायक माना जाता है
कई लोग रोजाना तांबे के लोटे से जल पीते हैं. यह आदत सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ी है.
पीतल (Brass): चांदी का व्यावहारिक विकल्प
क्यों माना जाता है पीतल शुभ?
पीतल, तांबा और जस्ता का मिश्रण है और पूजा में इसका उपयोग सदियों से होता आया है. दीपक, घंटी, थाली लगभग हर पूजा सामग्री पीतल में आसानी से मिल जाती है.
-देवी-देवताओं की मूर्तियों में प्रयोग
-आरती और हवन के लिए उपयुक्त
-लंबे समय तक टिकाऊ और किफायती

ग्रामीण घरों में आज भी पीतल के बर्तन संभालकर रखे जाते हैं, जिन्हें पीढ़ियों तक पूजा में इस्तेमाल किया जाता है.
कांसा (Bell Metal): सात्विकता और संतुलन
नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने वाली धातु
कांसा, जिसे बेल मेटल भी कहा जाता है, पूजा थाली और घंटियों में खूब इस्तेमाल होता है. माना जाता है कि इससे निकलने वाली ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है.
-नकारात्मक ऊर्जा कम होती है
-पूजा का माहौल शांत और सात्विक बनता है
-ध्यान और मंत्र जाप में सहायक
इसी वजह से मंदिरों में कांसे की घंटियां आमतौर पर देखने को मिलती हैं.

पंचधातु: संतुलन का प्रतीक
पांच धातुओं का अद्भुत मेल
पंचधातु में सोना, चांदी, तांबा, लोहा और जस्ता शामिल होते हैं. इससे बनी मूर्तियों को बेहद शुभ माना जाता है.
-जीवन में संतुलन और स्थिरता का प्रतीक
-सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक
-ग्रह दोष शांति के उपायों में उपयोगी
कई लोग घर में पंचधातु की छोटी मूर्ति या यंत्र रखना पसंद करते हैं.
लोहा (Iron): सुरक्षा का संकेत
लोहा आम पूजा में कम दिखता है, लेकिन शास्त्रों में इसे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली धातु माना गया है. विशेष उपायों या टोटकों में इसका प्रयोग किया जाता है.
सबसे जरूरी क्या है? भावना और श्रद्धा
चाहे तांबा हो, पीतल या कांसा अगर मन सच्चा है, तो पूजा का फल जरूर मिलता है. शास्त्र भी यही कहते हैं कि धातु से ज्यादा महत्व भक्ति का होता है. महंगी चांदी न हो, तो चिंता छोड़िए और श्रद्धा के साथ पूजा कीजिए.







