शुक्र प्रदोष मुहूर्त और शुभ योग
माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 30 जनवरी, 11:09 एएम से
माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: 31 जनवरी, 8:25 एएम तक
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 5:59 बजे से लेकर रात 8:37 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 पी एम से 12:56 पी एम तक
निशिता मुहूर्त: देर रात 12:08 ए एम से 01:01 ए एम तक
शिव पूजा मंत्र
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे “न” काराय नमः शिवाय॥
शुक्र प्रदोष व्रत और पूजा विधि
- प्रात:काल यानि ब्रह्म मुहूर्त 05:25 ए एम से 06:18 ए एम के बीच स्नान आदि से निवृत हो जाएं. फिर साफ कपड़े पहनें. हाथ में जल और फूल लेकर प्रदोष व्रत और शिव पूजा का संकल्प लें.
- इसके बाद शिवजी की दैनिक पूजा करें. सूर्य देव को जल अर्पित करें. दिनभर फलाहार पर रहें. शिव भजन करें. शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा सामग्री के साथ शिव मंदिर जाएं या फिर घर पर पूजा करें.
- सबसे पहले गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें. उसके बाद पंचामृत अर्पित करें. फूल, अक्षत्, शहद, बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, माला, चंदन आदि शिव मंत्रोच्चार करते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं. धूप और दीप जलाएं.
- भगवान शिव को बेर, मिठाई, खीर आदि का भोग लगाएं. उसके बाद शिव चालीसा पढ़ें और शुक्र प्रदोष व्रत कथा सुनें. इसके बाद शिव जी की आरती करें. पूजा का समापन क्षमा प्रार्थना से करें.
- रात्रि के समय में जागरण करें. फिर अगली सुबह स्नान आदि से निवृत होकर शिव पूजा करें. अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.
शिवजी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा…
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा…
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ओम जय शिव ओंकारा…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा…
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा…
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा…
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा…
कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/news/dharm/shukra-pradosh-january-2026-puja-vidhi-muhurat-mantra-aarti-samagri-importance-of-pradosh-vrat-ws-e-10119514.html







