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Hanuman Chalisa in Mithila Painting: मुजफ्फरपुर की इपाशा पाठक ने मिथिला पेंटिंग में हनुमान चालीसा के 40 श्लोकों को चित्रित किया है. इपाशा पाठक बताती हैं कि हनुमान चालीसा को मिथिला पेंटिंग के रूप में प्रस्तुत करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को सनातन धर्म से जोड़ना है. इसको बनाने में 25 दिन लगा. इसकी मांग देश-विदेश में बढ़ रही है.
मुजफ्फरपुरः अभी तक तो आप सिर्फ हनुमान चालीसा को शब्दों में या वीडियो में देखे सुने होंगे. लेकिन मुजफ्फरपुर शहर की रहने वाली कलाकार इपाशा पाठक ने पारंपरिक मिथिला पेंटिंग को एक नई पहचान देते हुए उसे आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया है. उन्होंने मिथिला पेंटिंग के माध्यम से एक कागज के टुकड़े पर पूरा हनुमान चालीसा में घटित घटनाओं का वर्णन किया हैं. जिसको लोग खूब पसन्द कर रहे हैं. इसकी डिमांड मुजफ्फरपुर के अलावा आस पास के जिला से भी खूब मिल रही हैं.
40 श्लोकों को रंगों और रेखाओं से किया जीवंत
इपाशा पाठक बताती हैं कि हनुमान चालीसा को मिथिला पेंटिंग के रूप में प्रस्तुत करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को सनातन धर्म से जोड़ना है. उनका मानना है कि यदि दिन की शुरुआत किसी आध्यात्मिक कलाकृति को देखकर हो, तो मन में सकारात्मकता स्वतः उत्पन्न होती है. इसी भावना के साथ उन्होंने हनुमान चालीसा के 40 श्लोकों को रंगों और रेखाओं के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास किया.
प्रत्येक चौपाई में अलग प्रसंग, भाव और ऊर्जा
हालांकि यह कार्य आसान नहीं था. इपाशा के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हनुमान चालीसा के हर श्लोक के भाव और संदेश को चित्रों के माध्यम से सही ढंग से प्रस्तुत किया जाए. प्रत्येक चौपाई में अलग-अलग प्रसंग, भाव और ऊर्जा समाहित है, जिसे मिथिला पेंटिंग की पारंपरिक शैली में ढालना काफी कठिन रहा. बावजूद इसके, उन्होंने धैर्य और समर्पण के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया.
25 दिन का लगा समय
इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में उन्हें करीब 25 दिन का समय लगा. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक मिथिला पेंटिंग के रंग संयोजन, प्रतीकों और बारीक रेखाओं का विशेष ध्यान रखा, ताकि लोककला की मौलिकता बनी रहे और हनुमान चालीसा की आध्यात्मिक गरिमा भी अक्षुण्ण रहे.
इपाशा बताती हैं कि इस कलाकृति की मांग लगातार बढ़ रही है. खास बात यह है कि विदेश में रहने वाले भारतीयों ने भी इसे काफी पसंद किया है. सूडान में रहने वाले एक भारतीय ने इसका ऑर्डर दिया था, जबकि मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में भी यह कलाकृति भेजी जा चुकी है. वर्तमान में फ्रेम की गई मिथिला हनुमान चालीसा की कीमत लगभग चार हजार रुपये रखी गई है.
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