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क्या आपकी कुंडली में है कालसर्प दोष? बिना अनुष्ठान इस छोटे उपाय से होगा निवारण, रामायण में भी है उल्लेख


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Kalsarpa Dosha Remedy: हिंदू धर्म में कालसर्प दोष को बेहद अशुभ माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दोष के कारण व्यक्ति को मानसिक तनाव, आत्मविश्वास की कमी, करियर में रुकावट और वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. करौली के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पं. हरिमोहन शर्मा के अनुसार, कालसर्प दोष के निवारण के लिए महंगी और जटिल पूजा के बजाय एक सरल उपाय भी प्रभावी है. उन्होंने बताया कि गरुड़ जी का पेंडल धारण करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को शांत किया जा सकता है.

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करौली. हिंदू धर्म में कालसर्प दोष को अत्यंत अशुभ माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष होता है, उसे जीवन में अनेक विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. कालसर्प दोष के कारण मानसिक तनाव, आत्मविश्वास की कमी के साथ-साथ करियर और वैवाहिक जीवन में भी कई प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होती हैं.

इस दोष के निवारण के लिए लोग महंगी और जटिल पूजा-पाठ व अनुष्ठानों का सहारा लेते हैं. विशेष रूप से नदी तटों, शिव मंदिरों और सिद्ध पीठों पर विशेष पूजा कराई जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कालसर्प दोष को एक सरल और प्रभावी उपाय से भी शांत किया जा सकता है.

क्या है कालसर्प दोष

करौली के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पं. हरिमोहन शर्मा बताते हैं कि यदि जन्म कुंडली में राहु, केतु और शनि के बीच सभी ग्रह आ जाए, तो उस कुंडली में कालसर्प दोष माना जाता है. इस दोष से मुक्ति के लिए लोग पारंपरिक पूजा-विधि अपनाते हैं, लेकिन एक ऐसा आसान उपाय भी है, जिसे बिना किसी विशेष अनुष्ठान के अपनाया जा सकता है.

गले में धारण करें गरुड़ का पेंडल

पं. हरिमोहन शर्मा के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उन्हें पूजा-पाठ से पहले अपने गले में गरुड़ जी का पेंडल धारण करना चाहिए. यह पेंडल चांदी या किसी भी उपयुक्त धातु का हो सकता है. उनका कहना है कि गरुड़ जी का पेंडल न केवल कालसर्प दोष को शांत करता है, बल्कि कुंडली के अन्य कई दोषों के प्रभाव को भी कम करता है. उन्होंने बताया कि जातक अपनी श्रद्धा अनुसार गरुड़ जी का पेंडल बनवाकर उसका पंचामृत से अभिषेक करें और फिर श्रद्धापूर्वक गले में धारण करें.

रामायण में भी मिलता है उल्लेख

पं. हरिमोहन शर्मा बताते हैं कि इस उपाय का उल्लेख रामायण में भी मिलता है. जब इंद्रजीत ने लक्ष्मण जी को नागपाश में बांध दिया था, तब हनुमान जी गरुड़ जी को लेकर आए थे. गरुड़ जी के आते ही नागपाश समाप्त हो गया. आध्यात्मिक दृष्टि से यह कालसर्प दोष का ही प्रभाव था, जिसे गरुड़ जी ने समाप्त किया. इसी कारण कालसर्प दोष के निवारण के लिए गरुड़ जी का पेंडल सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से Bharat.one हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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क्या आपकी कुंडली में है कालसर्प दोष? बिना अनुष्ठान इस छोटे उपाय से होगा निवारण

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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