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Shiv Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है. पूरे साल में सामान्य रूप से चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, लेकिन उज्जैन में यह पर्व पांचवीं बार भी मनाया जाता है. यह अनोखी शिव नवरात्रि केवल उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ही आयोजित होती है. आइए जानते हैं ऐसा क्यों?
Shiv Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि को आस्था और शक्ति का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है. पूरे देश में सामान्य रूप से साल में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, लेकिन धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी उज्जैन में यह पर्व एक विशेष रूप में पांचवीं बार भी मनाया जाता है. बता दें, विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका स्थान तीसरा माना जाता है. महाकाल की नगरी की परंपराएं अन्य स्थानों से बिल्कुल अलग और अद्भुत हैं. शिप्रा नदी के पावन तट पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यहीं कुंभ मेले जैसे भव्य धार्मिक आयोजन भी होते हैं. सभी ज्योतिर्लिंगों में महाकाल का स्थान विशिष्ट माना जाता है, क्योंकि यह पृथ्वी पर स्थापित एकमात्र स्वयंभू और मान्य शिवलिंग है. साथ ही, महाकाल दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए हैं, जिससे उनकी महिमा और भी बढ़ जाती है. यही कारण है कि यहां सामान्य शिवरात्रि नहीं, बल्कि विशेष शिव नवरात्रि मनाई जाती है. तो आखिर उज्जैन में शिव नवरात्रि में ऐसा क्या खास होता है? यही रहस्य इसे पूरे देश में अनोखा बनाता है.
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिवजी का देवी पार्वती से विवाह हुआ था. शिव नवरात्रि इसी विवाह के पहले का उत्सव है. ये उत्सव सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही मनाया जाता है, जो महाशिवरात्रि से नौ दिन पहले शुरू होता है. इन नौ दिनों में भगवान महाकाल को चंदन का लेप और मेहंदी लगाई जाती है. इसके साथ ही नौ दिनों तक भगवान महाकाल का मोहक शृंगार के साथ ही पूजन, अभिषेक और अनुष्ठान भी किया जाता है.
साल में एक बार बनते हैं बाबा महाकाल दुहले
महेश पुजारी ने बताया, जिस तरह शादी विवाह में परिवार मे लोग उत्सव बनाते हैं. वैसे ही महाकल की नगरी मे भी शिव के विवाह पर उत्सव बनाया जाता है. यह एक परम्परा है. यहां अवंतिका क्षेत्र का महत्व भी है. इसलिए अवंतिका नगरी को धार्मिक नगरी भी कहा जाता है. नौ दिन अपने भक्तो को अलग अलग स्वरूप मे महाकाल दर्शन देते है और आखरी दिन बाबा का सेहरा सजा कर दुहला बनाया जाता है.
पांच बार क्यों मनाई जाती है अवंतिका में नवरात्रि
अवंतिका नगरी माता हरसिद्धि का मंदिर भी है जो 51 शक्ति पीठों में से एक है इसलिए यहा की मान्यता और बढ़ जाती है क्योंकि अवंतिका में शिव के साथ शक्ति विराजमान है. इसलिए भी यहां का महत्व बढ़ जाता है. इसलिए यहा माता की नवरात्रि का पर्व भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. उसी के साथ-साथ यहा शिवनवरात्री होती है. यहा महाकाल मंदिर में शिवरात्रि तो बनती ही है लेकिन यहां नौ दिन की नवरात्री बनाने की परम्परा है, जिसे हम शिवनवरात्रि कहते है. जो पुरे देश में उज्जैन में ही मानी जाती है.
शिव नवरात्रि में दर्शन का है विशेष महत्त्व
जो भी भक्त इस 9 दिन के अंदर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं. पूजन के लिए आते है साथ ही अपनी कई मनोकामना लेकर भी आते हैं. बहुत सारे लोग शिवरात्रि पर व्रत रखते हैं या शिव का विशेष पूजन आदि करते हैं. वो अगर शिवनवरात्रि में आकर भगवान महाकाल का दर्शन पूजन करले तो उस भक्त को शिवरात्रि के महत्व के बराबर बाबा का दर्शन का आशीर्वाद मिलता है. इसलिए यहा शिवनवरात्रि बनाई जाती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining Bharat.one she has worked with Re…और पढ़ें







