भारत में चावल केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की थाली का अहम हिस्सा है. उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, कई राज्यों में लोग सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक किसी न किसी रूप में चावल का सेवन करते हैं. इडली, डोसा, खिचड़ी, पुलाव या सादा भात—चावल सदियों से भारतीय खानपान की रीढ़ रहा है. आमतौर पर लोग सफेद चावल या भूरे चावल खाते हैं, लेकिन आजकल सेहत को लेकर जागरूक लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है.
दरअसल, सफेद चावल और भूरे चावल के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी प्रोसेसिंग प्रक्रिया का होता है. ब्राउन राइस यानी भूरे चावल बिना पॉलिश किए हुए होते हैं. इनमें चावल की बाहरी परतें जैसे ब्रान और जर्म बनी रहती हैं, जिस वजह से इनमें प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं. वहीं सफेद चावल पूरी तरह पॉलिश किए जाते हैं, जिससे उनका रंग तो साफ और बनावट नरम हो जाती है, लेकिन इसी प्रक्रिया में कई जरूरी पोषक तत्व निकल जाते हैं. यही कारण है कि दोनों के स्वास्थ्य लाभ अलग-अलग माने जाते हैं.
भूरे चावल को पोषण का अच्छा स्रोत माना जाता है. इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है. यही वजह है कि वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ब्राउन राइस एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, फास्फोरस और विटामिन बी जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की ऊर्जा, हड्डियों की मजबूती और मेटाबॉलिज़्म के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. ब्राउन राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, जिससे यह ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प बन सकता है.
दूसरी ओर, सफेद चावल का स्वाद हल्का होता है और यह जल्दी पकता व जल्दी पचता है. यही कारण है कि जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है, बुजुर्ग या बीमारी से उबर रहे मरीजों के लिए सफेद चावल आरामदायक माना जाता है. इसके अलावा, जिन लोगों को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है, जैसे ज्यादा शारीरिक मेहनत करने वाले लोग, उनके लिए भी व्हाइट राइस फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, इसमें फाइबर कम होने की वजह से यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है और लंबे समय तक पेट भरा रहने का एहसास नहीं देता.
हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि ब्राउन राइस हर किसी के लिए आदर्श विकल्प नहीं है. इसमें मौजूद फाइटेट्स कुछ खनिजों के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं. साथ ही जिन लोगों को गैस, एसिडिटी, पेट फूलने या कब्ज जैसी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए ज्यादा फाइबर वाला ब्राउन राइस परेशानी बढ़ा सकता है. ऐसे में उन्हें सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही इसका सेवन करना चाहिए.
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-white-rice-vs-brown-rice-which-is-better-for-health-ws-ekl-10130397.html







