Reasons of Dirty Thoughts: कई लोगों का अपने विचारों पर कंट्रोल नहीं होता है. वे अक्सर नेगेटिव, गंदी और अश्लील बातें सोचने लगते हैं. कई लोग यह शिकायत करते हैं कि उनके मन में बार-बार नेगेटिव, अजीब या गंदे खयाल आते रहते हैं और इन्हें चाहकर भी नहीं रोक पाते हैं. इसे कुछ लोग मानसिक कमजोरी या स्ट्रेस मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच यह है कि इसके पीछे शरीर में कुछ जरूरी विटामिन्स की कमी हो सकती है. दिमाग और नर्वस सिस्टम सही तरह से काम करे, इसके लिए पोषण का संतुलन बेहद जरूरी है. जब यह बिगड़ता है, तो उसका असर सीधे सोच, मूड और व्यवहार पर दिखने लगता है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो विटामिन B12 की कमी ऐसे गंदे या अनचाहे विचारों की सबसे बड़ी वजहों में से एक मानी जाती है. विटामिन B12 दिमाग की नसों को मजबूत रखने और न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी होने पर व्यक्ति को एंजायटी, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, कंफ्यूजन और बार-बार नेगेटिव या गलत खयाल आने की समस्या हो सकती है. कई मामलों में लोग बिना वजह अपराधबोध या डर महसूस करने लगते हैं.
गंदे विचार आने की वजह शरीर में विटामिन D की कमी भी हो सकती है. यह विटामिन मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है. विटामिन D को सनशाइन विटामिन कहा जाता है और यह मूड को कंट्रोल करने वाले हार्मोन सेरोटोनिन से जुड़ा है. जब शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो व्यक्ति उदासी, चिड़चिड़ापन और नेगेटिव सोच की गिरफ्त में आ सकता है. रिसर्च बताती हैं कि लंबे समय तक विटामिन D की कमी रहने पर ओवरथिंकिंग और डर्टी थॉट्स बढ़ सकते हैं.
विटामिन B6 और फोलिक एसिड की कमी भी दिमागी संतुलन बिगाड़ सकती है. ये विटामिन्स दिमाग में केमिकल मैसेंजर बनाने में मदद करते हैं, जो हमारी सोच और भावनाओं को कंट्रोल करते हैं. इनकी कमी से मूड स्विंग्स, गुस्सा, बेचैनी और बार-बार गलत या अश्लील विचार आने लगते हैं. कई बार व्यक्ति खुद समझ नहीं पाता कि उसके खयाल इतने नेगेटिव क्यों हो गए हैं. यह सिर्फ विटामिन की कमी ही नहीं, बल्कि खराब लाइफस्टाइल भी समस्या को बढ़ा सकती है. जंक फूड खाना, नींद पूरी न होना, ज्यादा स्क्रीन टाइम, धूप से दूरी और शारीरिक गतिविधि की कमी इन जरूरी पोषक तत्वों को कम कर देती है.
अगर आपको बार-बार गंदे या परेशान करने वाले खयाल आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें. सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेकर विटामिन B12, विटामिन D और अन्य जरूरी विटामिन्स की जांच कराएं. संतुलित आहार, धूप में समय बिताना, नियमित एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेने से स्थिति में काफी सुधार आ सकता है. अगर समस्या ज्यादा गंभीर लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना भी उतना ही जरूरी है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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