Monday, March 2, 2026
21 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

डायबिटीज की छुट्टी! चीनी वैज्ञानिकों ने खोजा ऐसा इलाज, बिना दवा ठीक हुआ 59 साल का मरीज!


Last Updated:

Diabetes New Treatment : क्या दुनिया से अब ‘डायबिटीज’ का नामो-निशान मिटने वाला है? चीनी वैज्ञानिकों के एक नए और क्रांतिकारी शोध ने इस उम्मीद को हकीकत में बदलने की कोशिश की है. शंघाई शांगजेंग अस्पताल और पेकिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने स्टेम सेल तकनीक के जरिए एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है. इस तकनीक की मदद से 59 साल के एक ऐसे मरीज का इलाज किया गया, जो दशकों से टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहा था. वैज्ञानिकों ने मरीज के अपने ही सेल्स से ही कृत्रिम पैंक्रियाटिक सेल्स तैयार किए, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन बनाने में सक्षम हैं. इससे मरीज अब दवाओं और इंजेक्शन के बोझ से पूरी तरह मुक्त हो चुका है.

अगर आप या आपके घर में कोई हर रोज डायबिटीज की गोलियां और इंसुलिन के इंजेक्शन से परेशान है, तो यह खबर आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है! चीन में कुछ वैज्ञानिकों ने मिलकर टाइप 2 डायबिटीज को स्टेम सेल थेरेपी से ठीक करने का तरीका खोज लिया है. यह कैसे संभव हुआ, यहां जानिए.

चीन के वैज्ञानिकों ने दुनिया में पहली बार स्टेम सेल तकनीक के जरिए एक 59 साल के डायबिटीज मरीज को पूरी तरह ठीक कर दिया है. जी हां, अब उस मरीज को न दवा की जरूरत है और न ही इंजेक्शन की. साधारण इलाज में हम बाहर से इंसुलिन लेते हैं, लेकिन इस तकनीक में मरीज के सेल्स से ही नया पैंक्रियास (अग्न्याशय) तैयार किया जाता है. जब इसे मरीज के शरीर में वापस डाला जाता है, तो पैंक्रियास दोबारा जीवित हो उठता है और खुद इंसुलिन बनाना शुरू कर देता है. चीन के शंघाई शांगजेंग अस्पताल और पेकिंग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने स्टेम सेल तकनीक से कृत्रिम पैंक्रियाटिक सेल्स बनाए हैं. जब ये सेल्स 59 साल के टाइप 2 डायबिटीज मरीज को लगाए गए, तो उनकी बीमारी पूरी तरह कंट्रोल में आ गई.

यह तकनीक कैसे काम करती है? आम तौर पर टाइप 2 डायबिटीज में पैंक्रियास ठीक से काम नहीं करता, जिससे इंसुलिन बनना कम हो जाता है. तब इंसुलिन इंजेक्शन या टैबलेट के जरिए शरीर में डाला जाता है और डायबिटीज को कुछ समय के लिए कंट्रोल किया जाता है. स्टेम सेल तकनीक वाले इलाज में, मरीज के शरीर से सेल्स निकाले जाते हैं और उन्हीं से इंसुलिन बनाने वाले पैंक्रियास सेल्स तैयार किए जाते हैं. फिर ये सेल्स उसी मरीज के शरीर में डाले जाते हैं. इससे पैंक्रियास की काम करने की क्षमता सुधर जाती है और टाइप 2 डायबिटीज कंट्रोल में आ जाती है.

Add Bharat.one as
Preferred Source on Google

रिसर्च के मुताबिक, 25 साल से टाइप 2 डायबिटीज से परेशान 59 साल के एक बुजुर्ग को स्टेम सेल ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई है. इलाज के बाद, 11 हफ्तों में बिना इंसुलिन इंजेक्शन के मरीज पूरी तरह टाइप 2 डायबिटीज से ठीक हो गया है, ऐसा वैज्ञानिकों ने बताया है. इस इलाज के बाद मरीज अब दुनिया में पहली बार बिना इंसुलिन या दवा के अपनी ब्लड शुगर को सही तरीके से कंट्रोल कर रहा है.

यह इलाज डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद है, लेकिन इसमें कुछ सावधानी भी जरूरी है. अभी तक सिर्फ एक मरीज को ही स्टेम सेल इलाज से फायदा हुआ है. सुरक्षा और असर को पक्का करने के लिए और बड़े स्तर पर मेडिकल टेस्ट की जरूरत है. खासकर टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए, इसे ज्यादा लोगों पर टेस्ट करना जरूरी है, इसलिए अगले कदम में वैज्ञानिक इसी दिशा में काम करेंगे ऐसा उम्मीद है. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसने करोड़ों डायबिटीज मरीजों को एक नई उम्मीद दी है.


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/health-medical-breakthrough-china-scientists-cure-type-2-diabetes-using-stem-cell-therapy-pancreatic-cells-local18-10231652.html

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img