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होली: केवल गुलाल नहीं, भीतर के आनंद का उत्सव है, क्रोध और ईर्ष्या के अशुभ रंगों को प्रेम में बदलने का साधन


होली सिर्फ चेहरे पर गुलाल मलने का नाम नहीं है. असली होली तब है जब आपके भीतर से प्रेम और आनंद की सुगंध आए. होली के दिन हमारा जीवन भी उत्साह और प्रेम के रंगों से खिलना चाहिए. हमारा चेहरा खुशी से चमकना चाहिए और हमारी वाणी में मधुरता होनी चाहिए. जीवन का रंग ऐसा ही होना चाहिए – वह रंग जो परमात्मा में गहरे विश्वास से उपजता है. हमें जीवन के जीवंत, सुगंधित और सुंदर रंगों के साथ होली खेलनी चाहिए, कीचड़ भरे पानी के साथ नहीं. हमें इस त्योहार को क्रोध, लालसा, लोभ, मोह, द्वेष और वासना के ‘अशुभ रंगों’ के साथ नहीं मनाना चाहिए. हर बार जब आप नकारात्मक होते हैं, तो आप क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, हताशा और घृणा के नकारात्मक स्पंदन प्रसारित करते हैं. जीवन में चुनौतियां आती हैं और अलग-अलग मानसिकता वाले लोग मिलते हैं, लेकिन जब आप अपनी दृष्टि का विस्तार करते हैं और अपने जीवन को व्यापक परिप्रेक्ष्य से देखते हैं, तो आप इन सभी छोटी समस्याओं को छोड़ देते हैं जो अभी आपको बहुत महत्वपूर्ण लग रही हैं.

मन के भावों का साक्षी बनना ही असली रंग है
प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अलग-अलग रंगों के दीये जल रहे हैं. किसी में क्रोध का दीपक जल रहा है, किसी में ईर्ष्या आदि का. यदि आपको लगता है कि कुछ लोग नकारात्मक हैं, तो उन्हें खुद से दूर रखें. दूसरी बात यह है कि यह जान लें कि वे हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे. समय के साथ वे बदल जाएंगे. यहाँ तक कि आपका अपना मन भी हर समय एक जैसा नहीं रहता. आपके मन के कई भाव होते हैं. आप खुशी महसूस करते हैं. आप क्रोध और ईर्ष्या महसूस करते हैं. आप करुणा महसूस करते हैं. आप उदारता महसूस करते हैं. लेकिन जब आप यह जान जाते हैं कि आप ये नहीं हैं, तो आप एक साक्षी के रूप में उनका आनंद लेते हैं. आप अपने मन के खेलों के साक्षी बनते हैं. आपके जीवन में सबसे कष्टदायक चीज कोई और नहीं, बल्कि आपका अपना मन है.

स्वयं में सुधार और परमात्मा पर अटूट विश्वास
आपको जो सोचने और करने की आवश्यकता है, वह है स्वयं में सुधार करना. दूसरे कैसे सुधरें- फिलहाल इसे उन्हीं पर छोड़ दें. यदि आप कर सकते हैं, तो उन्हें शिक्षित करें, लेकिन करुणा के साथ. प्रार्थना करें कि उनका जीवन बेहतर हो. कुछ समय प्रतीक्षा करें, फिर और प्रयास करें. यदि वे बदल जाते हैं, तो यह अच्छा है, लेकिन यदि वे नहीं बदलते हैं, तो बस आगे बढ़ें. और तीसरा विकल्प यह सोचना है, ‘ठीक है, उन्हें रहने दो. वे मुझ में और कुशलता ला रहे हैं.’ वे आपको अपने बोलचाल और व्यवहार में कुशल होने पर और अपनी सकारात्मकता पर बने रहने पर विवश करते हैं. अंतिम विकल्प है कि इसे परमात्मा पर छोड़ दें. बस अपने भीतर देखें कि आप में कितनी नकारात्मक बातें हैं और कितनी सकारात्मक?

साझा करने की खुशी और कर्म का सिद्धांत
जो दूसरों को कष्ट देते हैं वे वास्तव में स्वयं पीड़ित होते हैं और किसी न किसी रूप में आहत या घायल होते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास के दूसरों के लिए दुख और पीड़ा का कारण बनते हैं. एक सुखी और संतुष्ट व्यक्ति कभी किसी दूसरे को किसी भी तरह से परेशान नहीं करेगा. इसलिए वही प्रार्थना करें – सभी का मन और बुद्धि शुद्ध हो और सभी सही दिशा में चलें. जब आप कुछ करते हैं, तो प्रकृति आपको उससे और अधिक वापस देती है. यदि आप दूसरों को दुःख देते हैं, तो आपको वही वापस मिलता है. यदि आप खुशियाँ देते हैं, तो आपको वही वापस मिलता है, और यदि आप अपने पास जो कुछ भी है उसका थोड़ा सा हिस्सा दूसरों के साथ साझा करते हैं, तो वह आपके पास कई गुना होकर वापस आता है.

आत्मा के रंगों में रंगकर राष्ट्र सेवा की प्रेरणा
इस ग्रह पर सभी प्रकार के लोगों की आवश्यकता है. वे दुनिया को और अधिक रंगीन बनाते हैं. वे आपके भीतर कुछ बटन दबाते हैं और विशेष भावनाओं को जगाते हैं, और देखते हैं कि आप उस पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं. हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए? उनसे कहें, ‘अरे! जागो! हंसो और मुस्कुराओ.’ हमें ऐसा बनना चाहिए कि हम जहाँ भी जाएँ, हमारे भीतर से प्रेम और आनंद की सुगंध फैले. घटनाओं या परिस्थितियों के बावजूद, स्थिर रहें और स्वयं में स्थापित रहें. प्रसन्न और आनंदित रहें. यदि हमारे पास आंतरिक संतोष है, तो हम न केवल अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाएंगे, बल्कि दूसरों की इच्छाओं को भी पूरा करने में सक्षम होंगे. होली मौज-मस्ती और खुशियों का त्योहार है. और जीवन का यह रंग हमें समाज और राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. इसलिए ऐसी होली न खेलें जहाँ आप केवल एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं. इसे एक ऐसा त्योहार बनाएं जहाँ आप अपनी आत्मा के रंगों में रंगे हों.

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